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सांड पकडने का वो मंजर, लोगों में भय पैदा कर गया, देखें पूरा मामला..

यदि संडे नहीं होता तो हो सकती थी बडी दुर्घटना

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jaipur

सांड पकडने का वो मंजर, लोगों में भय पैदा कर गया, देखें पूरा मामला..

जयपुर. नगर निगम को शहर से 10 हजार सांड पकडऩे हैं, लेकिन रविवार का माजरा देखकर लगता है कि यह लक्ष्य पाने में उसे कई साल लग जाएंगे।
आधी-अधूरी तैयारी के साथ सांड पकडऩे निकली निगम की टीम 2 घंटे में केवल एक सांड पकड़ पाई। उसमें भी इतनी अफरा-तफरी मची कि संडे नहीं होता तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

यहां छकाया कर्मचारियों को

निगम की टीम सुबह 9 बजे मानसरोवर में सांडों को पकडऩे पहुंची। वाहन से उतरते ही कर्मचारी पटेल मार्ग पर घूम रहे एक सांड को पकडऩे आगे बढ़े। कर्मचारियों के हाथ में रस्सी देख सांड बीच सडक़ पर दौड़ा। यातायात के बीच सांंड को देखकर लोग सहम गए लेकिन गनीमत रही कि सांड किसी से टकराया नहीं। निगम के कर्मचारियों ने सांड के पीछे गाड़ी दौड़ा दी। सांड कर्मचारियों को पटेल मार्ग और आसपास की कॉलोनियों में दौड़ता-छकाता रहा।

यहां भी नहीं बनी बात

थकी-हारी टीम न्यू सांगानेर रोड की ओर से बढ़ी, जहां कर्मचारियों की नजर दूसरे सांड पर पड़ी। कर्मचारियों ने उसके गले में रस्सी डालने की कोशिश की लेकिन यह सांड भी भाग निकला। न्यू सांगानेर रोड के पास सेक्टर 101 में दौड़ता रहा। बेकाबू सांड से बचने के लिए लोगों ने घरों के गेट बंद कर लिए। कर्मचारी सांड को दौड़ाते रहे और सांड न्यू सांगानेर रोड स्थित निजी कॉलेज में जा घुसा। कर्मचारियों ने वहां से दौड़ाया तो सांड कॉलेज से बाहर निकला।

फिर कहीं जाकर सफलता मिली

यहां तक डेढ़ घंटा बीत गया, 10.30 बज गए लेकिन एक भी सांड पकड़ में नहीं आया। आधे घंटे बाद 11 बजे टीम ने जैसे-तैसे एक सांड को पकड़ा। इस दौरान बेकाबू सांड ने निगम के वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया। खुद भी बुरी तरह घायल हो गया। बाद में कर्मचारी उसे हिंगोनिया गौशाला ले गए।

ये रहीं खामियां

-टीम में नहीं दिखा पशु पकडने का कौशल
-सांड को पकडने एक वाहन में सिर्फ 4 कर्मचारी आए
-यातायात नहीं रोका गया
-बेकाबू सांड को काबू में करने के लिए टीम के पास संसाधन नहीं थे
-घायल सांड की मरहम पट्टी की भी व्यवस्था नहीं थी

ये हैं जिम्मेदार

ठेकेदार : रमेश कुमार शर्मा
फर्म : प्रिंस एन्टरप्राइजेज

ठेकेदार ने सांडों को पकडऩे के लिए उपयुक्त कर्मचारी नहीं दे रखे। जितने दे रखे हैं, उनसे ही काम चलाया जा रहा है।
-राकेश गुप्ता, पशुधन सहायक, नगर निगम