जयपुर

ऐसी ‘सफाई’ देखी नहीं कहीं… हर साल 50 लाख के डस्टबिन लगते ही गायब…न जांच, न रिपोर्ट

अजीब संयोग है, स्वच्छता सर्वेक्षण में तो शहर शीर्ष पर जगह नहीं बना पाया, लेकिन यहां की सफाई कमाल की है। कचरा पात्र लगते ही चंद दिनों में 'साफ' हो जाते हैं। सीसीटीवी की आंख के नीचे से गायब। किसी को खबर तक नहीं लगती।

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Mar 31, 2026

जयपुर. स्वच्छता के नाम पर शहर में कचरा पात्र लगाने का खेल चल रहा है। सड़क किनारे और फुटपाथ पर स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले लिटरबिन्स (कचरा पात्र) लगाए जाते हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण खत्म होने के दो माह में ही ये लिटरबिन्स गायब हो जाते हैं। अगले साल फिर नए सिरे से लगाए जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी चोरी होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। कभी भी चोरों तक पहुंचने की कोशिश ही नहीं की गई।नगर निगम हर साल 50 से 52 लाख रुपए खर्च कर सड़क किनारे लिटरबिन्स लगवाता है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश दो महीने के भीतर ही गायब हो जाते हैं। न तो चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई जाती, न ही किसी तरह की जांच होती। इसके बावजूद हर साल नए कचरा पात्र खरीद लिए जाते हैं।

पांच करोड़ से अधिक हो गए खर्च
पिछले 10 वर्ष की बात करें तो शहर में 13 हजार से अधिक लिटरबिन्स लगाए जा चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक प्रमुख मार्गों पर बमुश्किल एक हजार लिटरबिन्स लगे हैं। एक लिटरबिन लगाने में 4400 से 5200 रुपए तक खर्च होते हैं। ऐसे में चार हजार रुपए प्रति लिटरबिन्स की खरीद मान लें तो निगम पांच करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुका है। अभी लिटरबिन्स लगाने का काम ताज इंडस्ट्री के पास है।

यों चल रहा खेल?
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार हर साल 1000 से 1200 नए कचरा पात्र लगाए जाते हैं। कई क्षेत्रों में तो सर्वेक्षण के दौरान 300 से 400 लिटरबिन्स एक साथ लगते हैं।

ये है जमीनी हकीकत
-लगाए गए लिटरबिन्स का नियमित उपयोग नहीं होता
-कचरा समय पर उठाया नहीं जाता
-दो माह के भीतर अधिकांश पात्र गायब हो जाते हैं।
-सीसीटीवी से निगरानी, एफआइआर भी नहीं।


चयनित ठेकेदारों का दबदबा
सूत्रों के अनुसार कचरा पात्र लगाने का काम सीमित ठेकेदारों के पास रहता है। फिलहाल ताज इंडस्ट्रीज के पास काम है, जबकि पूर्व में भी कुछ चुनिंदा लोगों को ही यह जिम्मेदारी मिलती रही है। ये ही लोग लिटरबिन्स लगाने का काम करते हैं

इन इलाकों में हो रही नई सजावट
- मुरलीपुरा-विद्याधर नगर जोन-दूध मंडी-जयहसिंहपुरा खोर-सिंधी कैम्प बस स्टैंड


जानिए इन आंकड़ों को
-300 मीटर पर एक कचरा पात्र लगाने का प्रावधान
-100 मीटर पर लगाया जा सकता है लिटरबिन सघन आबादी में
-4400 से 5200 रुपए खर्च होते हैं एक लिटरबिन लगाने में

अभी लिटरबिन्स लगाने का काम चल रहा है। मुरलीपुरा और विद्याधर नगर जोन में लगाए जा रहे हैं। कुछ अन्य स्थानों पर भी लगाए जाएंगे। अभी संख्या नहीं बता सकते। पहले एक दो बार प्राथमिकी दर्ज करवाई है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आस-पास के थड़ी ठेले वाले या फिर पाार्किंग संचालक लिटरबिन्स हटा देते हैं।
-नीरू छीपा, एक्सईएन, नगर निगम मुख्यालय

Published on:
31 Mar 2026 11:26 am
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