जयपुर

प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम चल रहा ‘मौत का खेल’, अवैध गैस रिफिलिंग से कमाते इतना मुनाफा कि….

खुलेआम चल रहा मौत का खेल, फिर भी नहीं ले रहे सबक, आटा चक्की, साइकिल की दुकान तक पर हो रही गैस रिफिलिंग
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Updated: 24 Apr 2018, 12:24 PM IST
illegal gas refilling swing trafficking in Jaipur, Administration silence in Rajasthan

राजधानी में खुलेआम सड़को और गलियों में गैस रिफिलिंग का धंधा चल रहा है। विद्याधरनगर के हादसे के बावजूद लोग नहीं चेत रहे है हादसे के बाद भी अवैध गैस रिफिलिंग चल रही है। पत्रिका ने सोमवार को राजधानी के कई क्षेत्रों में देखा तो कई जगह मौत के ये कारखाने चलते मिले। लोग आटा चक्की, साइकिल की दुकान पर ही गैस रिफिलिंग कर मोटी कमाई करते हुए मिले। सरकार जो गैस करीब 45 रुपए किलो उपलब्ध कराती है, वहीं अवैध रुप से काम कर रहे लोग करीब सौ रुपए किलो में गैस बेच रहे है।

बदल देते है कंपनी -

गैस सिलेंडर की कंपनी बदलवाने की भी इन दुकानों पर व्यवस्था है। जब दुकानदार से पूछा कि हमारे पास भारत कंपनी का गैस सिलेंडर है और इसे बदलवाना है। दुकानदार ने कहा, किसी भी कंपनी का दे देंगे, पांच सौ रुपए लगेंगे।

जोखिम में जान, करें शिकायत -

रिहायशी इलाकों में गैस सिलेंडरों का भंडारण करना व अवैध तरीके से गैस ट्रांसफर करना कानूनी अपराध है। इस प्रकार की कोई गतिविधि दिखाई दे तो रसद विभाग व पुलिस प्रशासन को सूचना दी जा सकती है।

आपको बताते है कि क्या है पूरा मामला -

केस 1 ( एक किलो के 90 रुपए लगेंगे) -

रामपुरा रोड पर साइकिल की दुकान पर एक व्यक्ति पांच किलो का सिलेंडर लेकर खड़ा था। क्या गैस मिलेगी, इस सवाल पर जवाब मिला, एक किलो के 90 रुपए लगेंगे। फिर बासुंरी लगाकर घरेलू सिलेंडर से गैस भर दी गई।

केस 2 (गैस भरवाने आ रहे थे लोग) -

रामपुरा रोड पर ट्रांसफार्मर के पास बर्तनों की दुकान थी। दुकान में एक पर्दा लगा हुआ था, जिसके पीछे सिलेंडर भरने का काम किया जा रहा था। वहां 80 रुपए किलो से सिलेंडर भरवाने लोग छोटे सिलेंडर ला रहे थे।

केस 3 ( पहले हां की फिर मना किया) -

ठेके वाली गली के पास आटा चक्की की दुकान पर भी छोटे सिलेंडर भरे जाते है। दुकानदार ने पहले तो हां कर दी। तब तक वहां रसद विभाग के आने की अफवाह फैल गई। इसके बाद दुकानदार ने मना कर दिया।

पत्रिका ने खंगाला तो यह सच आया सामने - ऐसे होता है मौत का खेल -

पीतल के बांसुरीनुमा पाइप के एक ओर छोटे सिलेंडर के नाप की चूड़ी होती है। दूसरा नुकीला छोर बड़े सिलेंडर के नोजल के नाप का होता है। छोटे में पाइप कसने के बाद बड़े सिलेंडर को पीतल के पाइप पर रखा जाता है। कई बार तो इस प्रक्रिया के दौरान बहुत तेज गैस निकलती है, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका रहती है।

इन हादसों के बाद भी नहीं ले रहे सबक -

अक्टूबर,2017 - कानोता में गैस रिसाव, एक बच्चे की मौत
22 फरवरी 2018 - महेश नगर के जैतपुरी कॉलोनी में चार लोग झुलसे
23 मार्च 2018 - 3 शाहपुरा में गैस रिसाव में सात लोग गंभीर रुप से घायल
19 अप्रेल 2018 - विद्याधर नगर में हादसा, एक व्यक्ति घायल, कार टूटी

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