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रेलवे ने ध्वस्त की प्राचीन बावड़ी, अब हादसों का डर

रूपनगढ़-मकराना मार्ग पर रेलवे लाइन के निर्माण के दौरान बावड़ी का तोड़ा ऊपरी हिस्सा
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जयपुर

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Deendayal Koli

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Updated: 24 Apr 2018, 12:03 PM IST

ancient Water Source

जयपुर

जयपुर जिले में नरैना कस्बे के रूपनगढ़-मकराना मार्ग पर रेलवे लाइन के निर्माण के दौरान प्राचीन बावड़ी को ध्वस्त कर दिया गया है। रेलवे लाइन का काम प्राचीन बावड़ी से सटाकर ही किया गया है। जहां पर रेलवे अंडरपास का भी निर्माण किया गया है जिसके कारण बावड़ी के ऊपरी हिस्से को तोड़ दिया गया है। इससे उसका स्तर जमीन के स्तर से भी नीचा आ गया है। जिसके कारण बावड़ी नहीं दिखाई देती है। बावड़ी का आभास नहीं होने के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। मौत का कुआं बन चुकी बावड़ी में कभी मवेशी गिरते हैं तो कभी लोग गिर जाते हैं।

बावड़ी का ऊपरी हिस्सा ध्वस्त

जानकारी के अनुसार रेलवे लाइन का कार्य किया जा रहा है। इससे सदियों पुरानी बावड़ी को रेल लाइन के कार्य के चलते इसका ऊपरी हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया है जिस कारण यह बावड़ी दूर से ही नहीं, बल्कि पास से भी नहीं दिखाई देती है जिसके कारण हादसों को आमंत्रित कर रही है।

80 फीट गहरी बावड़ी में है पानी

स्थानीय निवासी अमित भारद्वाज ने बताया कि इस बावड़ी में रोजाना कोई न कोई मवेशी गिर जाता है जिसे ग्रामीणों की मदद से भारी मशक्कत से बाहर निकाला जाता है। बावड़ी की गहराई लगभग आज भी 80 फीट है। इस बावड़ी में पानी भी प्रचुर मात्रा में है लेकिन स्थानीय प्रशासन के इस ओर ध्यान नहीं होने से यह हादसे का सबब बनता जा रही है।

प्रशासन नहीं ले रहा सुध

ग्रामीण राकेश बोहरा ने बताया कि इस खुली बावड़ी की शिकायत स्थानीय प्रशासन को बार-बार अवगत कराने के बाद भी कोई कार्रवाई होना तो दूर पर आज तक मौका मुआयना तक नहीं हुआ। ग्रामीण प्रहलाद नावरिया का कहना है कि इसको पुन: पुराने स्वरूप में किया जाए या इसके खुले मुंह को बंद कर दिया जाए जिससे जन हानि व पशु हानि की आशंका नहीं रहे।


इसकी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी है। फिलहाल ग्राम पंचायत की जमीन पर होने के कारण यह बावड़ी ग्राम पंचायत की धरोहर है। लेकिन रेलवे ने इसे अपने कब्जे में ले लिया है। - ओमप्रकाश अटल, गिरदावर, हल्का नरैना