
जयपुर . राज्य में मन्त्रियों और अफसरों का आपसी टकराव जनता पर भारी पड़ रहा है। तनातनी और वर्चस्व की लड़ाई के चलते छोटी-मोटी फाइलें अटकना तो दूर, कई अहम परियोजनाएं और जनता से जुड़े आवश्यक कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। यहां तक कि ऐसे ही टकराव के कारण प्रधानमन्त्री आवास योजना में राजस्थान पिछड़ रहा है। दो माह पहले डॉक्टरों की हड़ताल भी ऐसी ही खींचतान से लम्बी चली थी।
राज्य में अनेक विभागों में मन्त्री-अफसर लड़ते रहे, जनता के काम अटकते रहे। तालमेल के अभाव में कहीं फाइलें रुकी रहीं, कहीं निर्णय लम्बित रहे। कुछ शिकायतें उच्च स्तर तक भी पहुंची लेकिन हालात नहीं सुधरे। इसका सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर पड़ रहा है।
राठौड़-सेठी
पीएम आवास योजना में पिछड़े
विवाद - गत जनवरी में पंचायत राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुदर्शन सेठी के बीच विवाद इस हद तक पहुंचा कि दोनों के बीच बातचीत तक बंद हो गई। सेठी ने राठौड़ को फाइलें भेजना बंद और राठौड़ की ओर से आई फाइलें लौटाना शुरू कर दिया था। दोनों ने साथ में बैठकें करना ही बंद कर दिया। नाराज राठौड़ ने मुख्य सचिव एनसी गोयल को पत्र भेजकर शिकायत की थी, जिसमें उन्होंने सेठी पर मनमानी करने का आरोप लगाया था। यह टकराव अब तक बरकरार है। पहले तत्कालीन पंचायत राज सचिव राजीव सिंह ठाकुर से भी राठौड़ का विवाद रहा।
असर- मंत्री और अफसर की लड़ाई के चलते प्रधानमंत्री आवास योजना में राजस्थान का ग्राफ गिरता जा रहा है। राज्य ने 2016-17 में 65 फीसदी लक्ष्य हासिल किया लेकिन 2017-18 में महज 26 फीसदी लक्ष्य तक पहुंचा। कई योजनाओं के लक्ष्यों में पिछडऩे के लिए खुद राठौड़ ही अफसरों को जिम्मेदार बता चुके हैं।
सराफ-गुप्ता
लम्बी चली थी डॉक्टरों की हड़ताल
विवाद- चिकित्सा मंत्री कालीचण सराफ और प्रमुख सचिव वीनू गुप्ता के बीच विवाद रहा। इस कारण कई अहम निर्णयों में देर हुई। अक्टूबर 2017 में कोटा में डेंगू को लेकर सराफ के समक्ष भाजपा विधायकों ने भी अफसरों की शिकायत की थी। सराफ अफसरों पर कार्रवाई नहीं कर सके, बल्कि विधायक पर कार्रवाई की बात कह दी थी।
असर- मंत्री और प्रमुख सचिव के बीच तालमेल के अभाव में ही डॉक्टरों की हड़ताल लम्बी चली। इस दौरान राज्य में विभिन्न कारणों से 50 लोगों की मौत हुई और सरकार को किरकिरी झेलनी पड़ी।
खान-आलोक
परियोजनाओं की गति पड़ी धीमी
विवाद- सार्वजनिक निर्माण मंत्री युनूस खान और आरएसआरडीसी के अध्यक्ष रहे आलोक के बीच विवाद इतना बढ़ा कि 15 फरवरी को सरकार ने खान को ही अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद आलोक को सिर्फ विभाग का प्रमुख सचिव रहने दिया गया।
विवाद- आरएसआरडीसी के अध्यक्ष पद पर आलोक को जून २०१७ में लगाया था लेकिन निगम के कामकाज को लेकर उनकी मंत्री से अनबन हो गई। इसके चलते आरएसआरडीसी की कई बड़ी परियोजनाओं की गति धीमी पड़ी।
ये विवाद भी रहे चर्चा में
- कामकाज के तरीके को लेकर स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी का अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश शर्मा से विवाद भी चर्चा में रहा। अभी भी इनके बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
- सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक और डेयरी फैडरेशन के एमडी राजेश यादव के बीच विवाद इस हद तक बढ़ा कि दोनों के बीच लम्बे समय तक बातचीत बंद रही।
- श्रम मंत्री जसवंत यादव और आजीविका मिशन के निदेशक कृष्ण कुणाल के बीच विवाद के कारण युवाओं के प्रशिक्षण से जुड़ी कई फाइलों के निस्तारण में विलम्ब हुआ।
- शहरी विकास मंत्री रहते हुए राजपाल सिंह शेखावत और तत्कालीन जेडीसी शिखर अग्रवाल, खान मंत्री के तौर पर राजकुमार रिणवा और वरिष्ठ आईएएस अशोक सिंघवी, परिवहन मंत्री युनूस खान और रोडवेज के तत्कालीन एमडी राजेश यादव के बीच भी तनातनी की खबरें सामने आती रही थीं।
इन्हें तवज्जो नहीं देते अफसर
ऐसी भी खबरें सामने आती रही हैं कि खान मंत्री सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी को उनके विभाग की प्रमुख सचिव अपर्णा अरोरा, शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी को उनके विभाग के सचिव नरेशपाल गंगवार तवज्जो नहीं देते। ये अधिकारी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के सम्पर्क में रहने की बात सामने आती रही है।
इधर सरकार बढ़ा चुकी है अफसरों की ताकत
सरकार ने सितम्बर-अक्टूबर 2017 में अफसरों की ताकत बढ़ाने वाले आदेश जारी किए। कलक्टरों को जिले के किसी भी अफसर पर 17 सीसी में कार्रवाई की शक्ति दी। जयपुर जिला परिषद की बोर्ड बैठक में 10 अक्टूबर को एसीओ को पद से हटाने के पारित आदेश पर कार्मिक विभाग ने रोक लगा दी। आदेश दिए कि आरएएस का तबादला और पदस्थापन सक्षम स्तर से ही हो सकता है। इसी तर्ज पर स्थानीय निकाय विभाग ने भी आदेश जारी किए।