
जयपुर। राजस्थान के अलवर निवासी IPS जगमोहन मीणा के इस्तीफे के बाद ओडिशा पुलिस महकमे में एक और इस्तीफा सामने आने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है। भुवनेश्वर के डीसीपी और 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा के इस्तीफे की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि अब 2025 बैच के प्रोबेशनर आईपीएस अधिकारी सीए रामदास (चौधरी अभिजीत रामदास) ने भी अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। खास बात यह है कि उन्होंने अपनी शुरुआती ट्रेनिंग पूरी होने से पहले ही इस्तीफा भेज दिया।
महाराष्ट्र के रहने वाले 33 वर्षीय सीए रामदास ने पिछले वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई थी। उन्हें ओडिशा कैडर आवंटित हुआ था और वर्तमान में वे हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में बुनियादी प्रशिक्षण ले रहे थे। अभी उनकी फील्ड पोस्टिंग भी नहीं हुई थी कि उन्होंने सेवा छोड़ने का निर्णय ले लिया।
ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) वाई. बी. खुरानिया ने मीडिया से बातचीत में पुष्टि की कि सीए रामदास का इस्तीफा विभाग को मिल चुका है। उन्होंने बताया कि चूंकि अधिकारी अभी प्रशिक्षण के शुरुआती चरण में हैं, इसलिए उन्होंने ओडिशा में फील्ड ड्यूटी भी शुरू नहीं की थी। हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
कुछ दिन पहले ही भुवनेश्वर के डीसीपी और राजस्थान के अलवर निवासी आईपीएस जगमोहन मीणा ने भी निजी कारणों का हवाला देते हुए भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं हुआ है। लगातार दो आईपीएस अधिकारियों के नौकरी छोड़ने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस्तीफे के बाद जगमोहन मीणा ने कहा था कि यह फैसला उन्होंने किसी दबाव या जल्दबाजी में नहीं लिया। परिवार और करीबी लोगों से लंबे विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। करीब 13 वर्षों तक ओडिशा कैडर में सेवा देने के बाद उन्होंने पूरी तरह व्यक्तिगत कारणों से पद छोड़ने का फैसला किया और अपनी निजता का सम्मान करने की अपील की।
पिछले कुछ समय में कई युवा आईपीएस अधिकारियों के इस्तीफे ने यह बहस तेज कर दी है कि आखिर प्रतिष्ठित मानी जाने वाली पुलिस सेवा से युवा अधिकारी दूरी क्यों बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर अधिकारी के इस्तीफे के पीछे अलग परिस्थितियां हो सकती हैं, लेकिन लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों का विश्लेषण जरूरी है।
हाल के वर्षों में कुछ अधिकारियों ने राजनीति में आने के लिए नौकरी छोड़ी, कुछ ने निजी क्षेत्र और कॉरपोरेट सेक्टर का रुख किया, जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में बेहतर अवसर मिलने के कारण सेवा से अलग हुए। ऐसे मामलों ने यह संकेत जरूर दिया है कि अब करियर विकल्प पहले की तुलना में कहीं अधिक विविध हो गए हैं।
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों को ऑल इंडिया सर्विसेज (AIS) नियम, 1958 के तहत इस्तीफा देने का अधिकार है। हालांकि, उनका इस्तीफा केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही प्रभावी माना जाता है। जब तक इस्तीफा स्वीकार नहीं होता, तब तक अधिकारी अपने पद पर बने रहते हैं।
नियमों के अनुसार इस्तीफा देने वाले अधिकारियों को सामान्य सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले अधिकांश लाभ नहीं मिलते। वहीं, निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन करने पर कुछ परिस्थितियों में इस्तीफा वापस लेकर सेवा में लौटने का अवसर भी दिया जा सकता है।
सीए रामदास के इस्तीफे के पीछे वास्तविक कारण अभी सामने नहीं आए हैं। वहीं, जगमोहन मीणा का इस्तीफा भी अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है। ऐसे में एक ही कैडर से कम समय में दो आईपीएस अधिकारियों के इस्तीफे ने ओडिशा पुलिस के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन इस्तीफों पर क्या फैसला लेती है और क्या भविष्य में इनके पीछे की वजहें सार्वजनिक होती हैं।