जयपुर

Jaipur Accident: 12 ट्रैफिक चालान के बाद भी कैसे दौड़ता रहा बेकाबू ट्रोला? सिस्टम की चूक ने ले ली 4 जिंदगियां

Jaipur Trola Accident: अजमेर रोड स्थित 200 फीट बाइपास पर एक परिवार को तेज रफ्तार ट्रोले ने कुचल दिया। इस हादसे में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस ट्रोले से हादसा हुआ, उस पर यातायात उल्लंघन के 12 चालान हो चुके हैं।
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Jul 08, 2026
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वह जगह जहां बेकाबू ट्रोले ने पूरे परिवार को कुचला। फोटो: पत्रिका

जयपुर। अजमेर रोड स्थित 200 फीट बाइपास पर मंगलवार सुबह दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया। यहां मुख्य सड़क व सर्विस रोड के बीच नाले पर बने डिवाइडर पर बैठकर बस का इंतजार कर रहे एक परिवार को तेज रफ्तार ट्रोले ने कुचल दिया। हादसे में तीन मासूम बच्चों और उनके पिता की मौत हो गई, जबकि मां गंभीर रूप से घायल हो गई। मां को एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया। मां की हालत गंभीर बनी हुई है। जान बचाने के लिए उसके दोनों पैर काटने पड़े।

इस हादसे में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस ट्रोले से हादसा हुआ, उस पर यातायात उल्लंघन के 12 चालान हो चुके हैं। इसी वर्ष 6 चालान हुए और 5 चालान लंबित हैं। यही वजह रही कि ट्रोला सड़क पर बेकाबू रफ्तार से दौड़ता रहा और मंगलवार को एक परिवार के लिए मौत का सबब बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भीषण था कि बच्चों के क्षत-विक्षत शव कई मीटर दूर नाले व डिवाइडर पर जा गिरे और घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। ट्रोला करीब 100 मीटर आगे जाकर रुका और चालक वाहन छोडकर फरार हो गया। हादसे के बाद करीब डेढ़ घंटे तक यातायात बाधित हो गया। सूचना मिलने पर जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल व एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजीव पचार सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। ट्रेलर को एक तरफ करवाकर अजमेर रोड पर रास्ता सुचारू करवाया।

इनकी हुई मौत, एक बच्चा नाले में गिरा

हादसे में राजसमंद के जैतपुरा निवासी चन्द्रप्रकाश बागरी और उसके 11 वर्षीय बेटे रमेश, 10 वर्षीय बेटे गोपाल उर्फ रतन व 8 वर्षीय बेटे दीपक की मौत हो गई। चन्द्रप्रकाश की पत्नी कैलाशी गंभीर रूप से घायल हो गई। चन्द्रप्रकाश परिवार के साथ वैशाली नगर झुग्गी में रहकर खजूर की झाडू बनाकर बेचने का काम करता था। झुंझुनूं निवासी प्रत्यक्षदर्शी नत्थूराम ने बताया कि वह नजदीक ही मजदूरी करता है। हादसे की सुनकर दौड़कर आया। पता चला कि एक बच्चा नहीं मिल रहा। बाद में उसका शव घटना से कुछ दूर नाले में मिला।

‘गांव जा रहा हूं…मिलने आऊंगा’, लौटे सिर्फ चार शव

एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी के बाहर साथी मांगीलाल महाराज ने बताया कि सोमवार सुबह चंद्रप्रकाश मिला था। बोला, अब गांव जा रहा हूं… फिर मिलने आऊंगा। किसी को नहीं पता था कि यह आखिरी मुलाकात होगी। चन्द्रप्रकाश के दो बेटे गांव में ही थे।

ट्रोले का मालिक : प्रेमवीर सिंह राठौड़, निवासी 65 फ्रेंड्स कॉलोनी, सिरसी रोड, जयपुर और 123 नई पोल, सिनली, जोधपुर के नाम से जोधपुर आरटीओ में पंजीकृत है।

लंबित चालान और जिम्मेदार अधिकारी

  • 2 अप्रेल : डीटीओ सुजानगढ़ 1700 रुपएजिम्मेदार अधिकारी : बंजरंग खीचड़, कार्यवाहक जिला परिवहन अधिकारी
  • 15 अप्रेल : आरटीओ बीकानेर 2500 रुपएजिम्मेदार अधिकारी : अनिल पंड्या, आरटीओ बीकानेर
  • 23 अप्रेल : जयपुर ट्रैफिक पुलिस 1500 रुपएजिम्मेदार अधिकारी : योगेश गोयल, डीसीपी ट्रैफिक जयपुर
  • 6 जून : डीटीओ नागौर 2000 रुपएजिम्मेदार अधिकारी : अवधेश चौधरी, डीटीओ नागौर
  • 3 जुलाई : सीकर आरटीओ 5,000 रुपएजिम्मेदार अधिकारी : मथुराप्रसाद मीणा, आरटीओ सीकर
  • 8 जुलाई घटनास्थल : अजमेर रोड, जयपुरजयपुर आरटीओ : चंपालाल, आरटीओ जयपुर प्रथम

पत्रिका व्यू : जिम्मेदारों ने दिया मौत को रास्ता

चार जिंदगियां ट्रोले ने नहीं, व्यवस्था की लापरवाही ने ली हैं। जिस वाहन के 12 चालान हो चुके हों, पांच चालान महीनों से लंबित हों, वह आखिर सड़क पर कैसे दौड़ता रहा? चालान काटकर फाइल बंद कर देना कानून का पालन नहीं, जिम्मेदारी से बचना है। न जुर्माना वसूला गया, न वाहन जब्त हुआ, न परमिट और लाइसेंस पर प्रभावी कार्रवाई हुई। एक विभाग चालान काटता रहा, दूसरा वसूली भूल गया और तीसरे ने वाहन को सड़क पर दौड़ने दिया। जब तक ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी और उन पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सड़कों पर मौत यूं ही बेखौफ दौड़ती रहेगी।

Updated on:
08 Jul 2026 07:53 am
Published on:
08 Jul 2026 07:52 am