अपने पुरखों की विरासत को संभालो, वरना अबकी बारिश में ये दीवार भी गिर जाएगी। कुछ ऐसे ही जज्बातों को लेकर दुनियाभर के जाने-माने आर्टिस्ट्स कलानगरी जयपुर में जुटे। मौका, रहा सोमवार को जयपुर आर्ट वीक के आगाज का।
जयपुर। अपने पुरखों की विरासत को संभालो, वरना अबकी बारिश में ये दीवार भी गिर जाएगी। कुछ ऐसे ही जज्बातों को लेकर दुनियाभर के जाने-माने आर्टिस्ट्स कलानगरी जयपुर में जुटे। मौका, रहा सोमवार को जयपुर आर्ट वीक के आगाज का। राजस्थान पत्रिका के सपोर्ट से आयोजित जयपुर आर्ट वीक की शुरुआत जलमहल की खूबसूरत आबोहवा के बीच हुई। इस दौरान कलाकारों ने कला के जरिए अनूठी शैली में जयपुरवासियों को विरासत को सहेजने का मैसेज दिया। कलाकारों ने अपनी अभिव्यक्ति को स्कल्पचर्स, तस्वीरों और टेक्सचर्स के माध्यम से कुछ इस प्रकार दर्शाया कि आर्टलवर्स जयपुर आर्ट वीक के चौथे सीजन के कारवां में बंध से गए।
जयपुर नगर निगम हेरिटेज और लिवरपूल बाइनियल और आर्टिस्ट नंदन घीया के संयुक्त तत्वावधान में जलमहल की लहरों के पास 'मंथन' आर्टिस्ट वॉक थ्रू का आयोजन हुआ। इस बीच समुद्र मंथन से प्रेरित स्कल्पचर्स, तस्वीरें और टेक्सचर्स को डिस्प्ले किया गया। जयपुर के कलाकार नंदन घीया ने अपने अनूठे स्कल्पचर्स के जरिए बताया कि किस प्रकार हैरिटेज को बचाया जा सकता है और परकोटे को सुंदर दिखाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस स्कल्पचर की रिचर्स के लिए उन्हें इंग्लैंड के मर्सीसाइड लिवरपूल भी जाना पड़ा। जहां पर उन्होंने इतिहास के अवशेषों को नजदीक से समझने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यह स्कल्पचर जयपुर के हेरिटेज को बचाने का संदेश देता है। 'आवतो बायरो बाजे: द थंडर्स रोर ऑफ एन एंपेंडिंग स्टोर्म' थीम पर जयपुर आर्ट वीक पब्लिक आर्ट्स ट्रस्ट ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित किया जा रहा है।
इस मौके पर डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफर निशांत घीया ने 'इधर-उधर' फोटो एग्जिबिशन में जलमहल के इर्द-गिर्द बदलती जिंदगियों को ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों के जरिए शोकेस किया। निशांत ने अपनी तस्वीरों में स्थानीय निवासियों, पर्यटकों, जानवरों और प्रकृति के सह अस्तित्व को दर्शाया। करीब 52 तस्वीरों में उन्होंने जलमहल की आबो-हवा को नजदीक से दिखाया। उनका कहना था कि जमीन से जुड़ाव रखने के मकसद से उन्होंने तस्वीरों को डिस्प्ले करने के साथ ही जमीन पर भी दर्शाया है।
हवामहल में कनाडा की कलाकार मोनिक रोमेको के साथ 'पैसेजेस' थीम वॉकथ्रू हुई। इसमें मेमोरी लॉस और अदृश्यता थीम को केंद्रित रखते हुए परफॉर्मेंस और इंस्टॉलेशन को प्रस्तुत किया गया। इस दौरान देसी-विदेशी पर्यटकों के बीच जैसी ही विरासत की कहानी को दर्शाते पर्दे गिरने लगे तो कलाप्रेमियों को खूबसूरती का आभास होने लगा।
जयपुर की कंटेम्परेरी डांसर कमाशी सक्सेना ने इन पर्दों के इर्द-गिर्द डांस मूव्स करके बताया कि हर एक इमारत हर किसी के लिए खास होती है। क्योंकि हर एक इमारत की अपनी कहानी होती है।
स्टोरीटेलर विनायक मेहता की ओर से 'टुगेदर थ्रू द सिनेमा' वॉक थ्रू का गोलेछा सिनेमा में संवादात्मक इंस्टालेशन हुआ। जहां बायोस्कोप के जरिए दो दृष्टिकोणों से एक प्रेम कहानी को शोकेस किया गया। इंस्टा रील की तर्ज पर उन्होंने मात्र एक मिनट की शॉर्ट मूवी बनाई है। इसमें नायिका अपने लिए लड़का ढूंढने निकलती है। सबसे खास बात है अहसासों की। उनके बायोस्कोप में दोनों तरफ से फिल्म को देखा जा सकता है। लेकिन दोनों ओर से अहसास अलग होते हैं। एक ओर से लड़के की फीलिंग्स को देखा जा सकता है, तो दूसरी ओर से लड़की की फीलिंग्स महसूस होती है।
पीएटीआई की संस्थापक अध्यक्ष सना रिजवान ने बताया कि सही मायनों में जयपुर आर्ट वीक इस शहर के लिए किसी गिफ्ट से कम नहीं है। इसकी स्थापना नई पीढ़ी के कंटेम्परेरी कलाकारों को मंच प्रदान करने और जयपुर के आर्ट लवर्स को कंटेम्परेरी कला से जुडऩे के लिए बनाया गया है। इसमें आठ दिनों तक पूरे जयपुर शहर में कलात्मक कला के रंग दिखाई देंगे। जयपुर की खूबसूरत धरोहरों पर आर्ट इंस्टॉलेशन, ग्रुप शो के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा दुनियाभर के जाने-माने आर्ट एक्सपर्ट्स की चर्चाओं के माध्यम से युवा आर्टिस्ट्स को राह मिल सकेगी।