
राजधानी जयपुर और दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में ई-रिक्शा चालकों की एक अजीब शिकायत सामने आ रही है। अचानक बीच सड़क पर वाहन रुक जाता है, मोटर बंद हो जाती है और चालक कुछ समझ नहीं पाता। सोशल मीडिया पर भी इसके कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। जिनमें बताया जा रहा है कि कैसे ई-रिक्शा बिना किसी वजह के ठप हो जाते हैं। इसके पीछे 'BAT-BMS' नाम का एक चीनी बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) ऐप बताया जा रहा है।
BAT-BMS असल में एक वैध ऐप है, जिसका काम लिथियम बैटरी की स्वास्थ्य, वोल्टेज और टेम्परेचर पर नजर रखना है। समस्या भारत में इस्तेमाल हो रही सस्ती लिथियम बैटरियों में है। इनमें ब्लूटूथ कनेक्टिविटी दी गई है, लेकिन कोई पासवर्ड प्रोटेक्शन या एक्सेस कंट्रोल नहीं है। रेंज में (लगभग 10-15 मीटर) कोई भी व्यक्ति इस ऐप से कनेक्ट होकर 'डिस्चार्ज कंट्रोल' फीचर का दुरुपयोग कर सकता है। डिस्चार्ज बंद होते ही मोटर को पावर सप्लाई रुक जाती है और गाड़ी तुरंत ठप हो जाती है। जयपुर में ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मुरलीपुरा, शास्त्री नगर, अजमेर रोड, टोंक रोड और चारदीवारी क्षेत्रों में इनकी भारी आवाजाही है। कई चालकों ने बताया कि दिन में कई बार गाड़ी अचानक रुक जाती है, जिससे यात्रियों के साथ झगड़ा हो जाता है और रोजगार प्रभावित हो रहा है। पुलिस ने जयपुर सहित पूरे राजस्थान में ई-रिक्शा चालकों से अपील की है कि वे विश्वसनीय ब्रांड की बैटरी ही लगवाएं, जिनमें पासवर्ड प्रोटेक्शन और मजबूत सिक्योरिटी फीचर्स हों। जयपुर ट्रैफिक पुलिस पहले से ही ई-रिक्शा मैनेजमेंट सिस्टम चला रही है, अब इस नए खतरे को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
यह कोई साइबर हैक नहीं, बल्कि "अनलॉकडोर" जैसी सुरक्षा चूक है। कई सस्ती बैटरियां डिफॉल्ट सेटिंग में खुली छोड़ दी जाती हैं। अच्छी कंपनियां मजबूत पासवर्ड, फर्मवेयर अपडेट और प्रोटोकॉल इस्तेमाल करती हैं, लेकिन लोकल या अनरेगुलेटेड मैन्युफैक्चरर्स में यह कमी आम है।
बैटरी मालिकों और डीलरों को तुरंत डिफॉल्ट पासवर्ड बदलना चाहिए। फर्मवेयर अपडेट कर संवेदनशील फीचर्स (लॉक/अनलॉक, डिस्चार्ज कंट्रोल) को सीमित या हटाया जा सकता है। सरकार और रेगुलेटर्स को BluetoothBMS वाले वाहनों के लिए अनिवार्य सिक्योरिटी स्टैंडर्ड लागू करने चाहिए। ऐप्स को भी बैटरी ID या PIN वेरिफिकेशन अनिवार्य करना चाहिए।
यह घटना सिर्फ ई-रिक्शा चालकों की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे इलेक्ट्रिक वाहन इकोसिस्टम (ई-बाइक, ई-कार) के लिए खतरे की घंटी है। सस्ते इंपोर्टेड कंपोनेंट्स पर निर्भरता बढ़ रही है, लेकिन साइबर सिक्योरिटी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। अगर समय रहते सुधार न किया गया तो सड़क दुर्घटनाएं बढ़ सकती हैं। BAT-BMS विवाद हमें याद दिलाता है कि तकनीक के साथ सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। निर्माताओं, सरकार और उपभोक्ताओं को मिलकर सख्त मानक लागू करने चाहिए। चालकों को सलाह है कि अपनी बैटरी का पासवर्ड चेक करवाएं और विश्वसनीय ब्रांड चुनें। यह घटना सुरक्षा चूक की मिसाल है, न कि किसी बड़े साइबर अटैक की। जागरूकता और त्वरित सुधार से इसे रोका जा सकता है।
इस ऐप के बारे में जानकारी मिली है। हालांकि अभी हमारे पास कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है। फिर भी हम इसका पता कर रहे हैं। यदि कोई इस प्रकार से किसी वाहन को रोकता है तो वह गलत है। उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शांतनु कुमार सिंह, डीआईजी, साइबर क्राइम