जयपुर

Jaipur: ग्रीन कॉरिडोर नहीं अब ड्रोन पहुंचाएगा कैडेवर अंग और ब्लड सैंपल, निजी मेडिकल यूनिवर्सिटी में शुरुआत

Cadaver organs transported by drones: जयपुर में अब अंग प्रत्यारोपण, लैब सैंपल भेजने, अस्पताल सुरक्षा और आपदा राहत जैसे कामों में अब ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

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Dec 17, 2025
ग्रीन कॉरिडोर से नहीं ड्रोन से जाएंगे कैडेवर अंग, फोटो मेटा एआइ

Cadaver organs transported by drones: जयपुर। अंग प्रत्यारोपण, लैब सैंपल भेजने, अस्पताल सुरक्षा और आपदा राहत जैसे कामों में अब ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एमजीयूएमएसटी) ने इसकी शुरुआत की है। अस्पताल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुकांत दास ने बताया कि ड्रोन के जरिए कैडेवर अंगों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक बहुत जल्दी पहुंचाया जा सकेगा।

अब तक इसके लिए एंबुलेंस और ग्रीन कॉरिडोर का सहारा लिया जाता था, जिसमें समय लगता था। ड्रोन तकनीक से ट्रैफिक और दूरी की परेशानी खत्म होगी। इसी तरह रक्त, बायोप्सी और अन्य लैब सैंपल भी तापमान नियंत्रित ड्रोन बॉक्स में तेजी से जांच केंद्रों तक पहुंचेंगे। इससे रिपोर्ट जल्दी मिलेगी और इलाज में देरी नहीं होगी।

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अस्पताल परिसर की भी निगरानी

अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार ड्रोन का इस्तेमाल अस्पताल परिसर की सुरक्षा निगरानी में भी किया जाएगा। 24 घंटे निगरानी, भीड़ नियंत्रण और आपात स्थिति पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी। बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं में ड्रोन के जरिए दवाइयां, ब्लड और जरूरी मेडिकल सामान पहुंचाना आसान होगा। यूनिवर्सिटी में ड्रोन तकनीक पर एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित करने की योजना है।

ग्रीन कॉरिडोर की नहीं दरकार

कैडेवर अंग और ब्लड सैंपल एक से दूसरे अस्पताल तक अब तक एंबुलेंस और ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पहुंचाए जाते हैं। जिससे शहरी ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव से देरी होने की आशंका बनी रहती है। ड्रोन के इस्तेमाल से इस समस्या से बड़ी राहत मिलेगी वहीं इलाज भी जल्द से जल्द शुरू हो सकेगा।

आपदा राहत कार्यों में भी इस्तेमाल

राजस्थान में आपदा राहत कार्यों के दौरान भी ड्रोन का उपयोग महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। बाढ़, आग जैसी गंभीर घटनाओं में मानवीय पहुंच नहीं होने की स्थिति में ड्रोन के इस्तेमाल से जनहानि को काफी हद तक काबू किया जा सकेगा।

पर्यावरण अनुकूल तकनीक से फायदा

दावा है कि तकनीक पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली), सुरक्षित और अत्यंत सटीक है। बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपदाग्रस्त क्षेत्रों में ब्लड, जीवन रक्षक दवाइयाँ और आवश्यक मेडिकल उपकरण पहुंचाने में यह तकनीक अत्यंत सहायक सिद्ध होगी, जहां पारंपरिक परिवहन साधनों की पहुंच सीमित हो जाती है। इसके लिए सरकार से आवश्यक अनुमतियां ली जा रही हैं।

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Published on:
17 Dec 2025 09:45 am
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