जयपुर

जयपुर में सीजेआइ सूर्यकांत : बोले- विवाद सुलझाने के लिए बोलने से ज्यादा पड़ता है सुनना, कॉन्फ्रेंस में 52 देशों का जमावड़ा

Rajasthan : जयपुर में मध्यस्थता पर राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों के 3 दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत ने कहाकि किसी को बोलने से ज्यादा सुनना पड़ता है।
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Jaipur CJI Surya Kant said resolve dispute one has to listen more than speak
Rajasthan : जयपुर में मध्यस्थता पर राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों के तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत व सीएम भजनलाल शर्मा। फोटो पत्रिका

Rajasthan : जयपुर में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत ने कहा कि जब वकीलों की व्यवस्था नहीं थी और विवाद होते थे, तब ग्राम पंचायतें मध्यस्थता के माध्यम से उनका समाधान करती थीं। उस समय और आज में एक बात समान है कि विवाद सुलझाने के बाद भी पंचायतों को पूरे गांव का नेतृत्व करना होता था। मध्यस्थता ये बताती है कि कोई भी एक आवाज किसी दूसरी आवाज को दबा ना पाए। सीजेआइ जयपुर में मध्यस्थता पर राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों के तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस कॉन्फ्रेंस में 52 कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधि आए हैं।

सीजेआइ सूर्यकांत ने कहा कि किसी को बोलने से ज्यादा सुनना पड़ता है। किसी को दोनों पक्षों की बात को सही तरीके से समझकर एक-दूसरे तक पहुंचाना पड़ता है। साथ ही यह विश्वास रखना पड़ता है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और साथ मिलकर बेहतर जीवन जीने का रास्ता निकाल सकते हैं। यह कोई आसान या सामान्य स्किल नहीं है। कानूनी पेशे में यह सबसे कठिन स्किल है। इसे सीखने के लिए ट्रेनिंग और अनुभव से लगातार सीखने की जरूरत होती है।

Rajasthan : जयपुर में मध्यस्थता पर राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों के 3 दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में सीएम भजनलाल शर्मा। फोटो @BhajanlalBjp

राजस्थान में अब तक 5.85 लाख को विधिक सहायता कराई जा चुकी है उपलब्ध

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आज दुनिया को शांति और मध्यस्थता की सबसे अधिक आवश्यकता है। न्यायालयों में लंबित मुकदमों के कारण व्यक्ति का समय, धन और संपत्ति प्रभावित होती है। वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने के बाद भी कई विवाद नहीं सुलझते। ऐसे में मध्यस्थता ऐसे विवादों का स्थायी और दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि भारत में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का कार्य परंपरागत रूप से पंचायतें करती रही हैं। पंचायतें केवल विवादों का निपटारा ही नहीं करती थीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच की कटुता भी समाप्त करती थीं। इसी सोच के तहत देश में संस्थागत मध्यस्थता को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्थान में अब तक 5.85 लाख लोगों को विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।

Rajasthan : जयपुर में मध्यस्थता पर राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों के तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र। फोटो @BhajanlalBjp

भारत में मध्यस्थता का सबसे बड़ा उदाहरण 'पंच परमेश्वर' की परंपरा - मेघवाल

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि भारत में मध्यस्थता का सबसे बड़ा उदाहरण 'पंच परमेश्वर' की परंपरा है। इसी परंपरा ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के स्तर तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और ब्लॉकचेन जैसी नई तकनीकों के कारण कानूनी चुनौतियां बढ़ी हैं तथा सीमा पार व्यापारिक विवादों की प्रकृति भी तेजी से बदल रही है। ऐसे में जटिल विवादों के लिए आधुनिक और प्रभावी समाधान आवश्यक हैं।

मेघवाल ने कहा कि संवाद से मिलने वाला न्याय समाज को अधिक शांतिपूर्ण बनाता है। मजबूत न्याय व्यवस्था से अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र दोनों सशक्त होते हैं। उन्होंने विवाद के बजाय संवाद और मध्यस्थता की संस्कृति अपनाने का आह्वान किया।

Rajasthan : राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों के सम्मेलन में उपस्थित लोग। फोटो @BhajanlalBjp

मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के निस्तारण में दूसरे स्थान पर है राजस्थान

राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता को सामाजिक सौहार्द और न्यायिक संस्थाओं में विश्वास स्थापित करने के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक न्याय व्यवस्था केवल न्याय प्रदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता के माध्यम से मामलों के निस्तारण में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है।

Updated on:
31 Jul 2026 10:53 pm
Published on:
31 Jul 2026 10:51 pm