
AI generated image of cyber bullying
बस पांच मिनट और मॉम। आप कई बार मोबाइल को लेकर बच्चों को टोकते हैं, लेकिन वे आपसे बस 5 मिनट और रुकने की कहते हैं। ध्यान रखें यही 5 मिनट कहीं आपके लाड़ले के लिए भारी न पड़ जाएं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स के बढ़ते चलन के बीच राजस्थान पुलिस ने अभिभावकों और बच्चों को सख्त चेतावनी दी है। पुलिस ने कहा है कि गेमिंग और रील्स के चक्कर में बच्चे फर्जी प्रोफाइल और साइबर बुलिंग के शिकार न हों। ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर रखें, अनुचित कंटेंट को तुरंत ब्लॉक करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 नंबर पर दें।
राजस्थान पुलिस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी पोस्ट में साफ कहा गया है कि बच्चे आसानी से फर्जी अकाउंट बनाकर या दोस्ती का झांसा देकर साइबर अपराधियों के जाल में फंस जाते हैं। गेमिंग प्लेटफॉर्म और शॉर्ट रील्स ऐप्स पर अजनबियों से बातचीत, दोस्ती या चैलेंज स्वीकार करने से मानसिक तनाव, ब्लैकमेलिंग और यहां तक कि शारीरिक नुकसान तक का खतरा बढ़ जाता है। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें।
साइबर अपराधी आकर्षक फोटो और झूठी कहानियों के साथ फर्जी प्रोफाइल बनाते हैं। गेमिंग या रील्स के नाम पर वे बच्चों से संपर्क साधते हैं, फिर धीरे-धीरे निजी जानकारी, फोटो या वीडियो मांगते हैं। बाद में इन्हीं चीजों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है। पुलिस के अनुसार, ऐसे मामलों में तुरंत 1930 पर कॉल करना सबसे जरूरी कदम है।
अभिभावकों को बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना चाहिए। गोपनीयता सेटिंग्स चेक करें, अजनबी फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने की आदत डालें और नियमित बातचीत से बच्चों को जागरूक बनाएं। अनुचित कंटेंट दिखने पर तुरंत रिपोर्ट और ब्लॉक करें। पुलिस का कहना है कि समय पर सतर्कता कई बड़े अपराधों को रोक सकती है।
राजस्थान में हाल के महीनों में इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर दोस्ती के नाम पर नाबालिगों को फंसाने, ब्लैकमेल करने और यहां तक कि दुष्कर्म के मामले सामने आए हैं। जयपुर, अलवर और अन्य जिलों में ऐसे कई मामले दर्ज हुए हैं, जहां फर्जी दोस्ती से शुरू होकर पीड़ितों को मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुंचाया गया। ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग के मामले भी प्रदेश में काफी संख्या में दर्ज हो रहे हैं। इन घटनाओं ने पुलिस को लगातार जागरूकता अभियान चलाने के लिए प्रेरित किया है।
किसी भी साइबर अपराध या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत 1930 पर दें। शिकायत cybercrime.gov.in पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती है। राजस्थान पुलिस साइबर क्राइम शाखा ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती है। पुलिस का संदेश साफ है—बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी परिवार और समाज दोनों की है। सतर्क रहें, जागरूक रहें और समय पर रिपोर्ट करें ताकि गेमिंग और रील्स का मजा अपराध का कारण न बने।
Updated on:
21 Sept 2026 12:04 pm
Published on:
21 Sept 2026 12:02 pm
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