जयपुर

जयपुर में कमर्शियल एरिया में चल रहे कोचिंग संस्थानों पर सुप्रीम कोर्ट ने JDA को लगाई फटकार, तीन हफ्ते में मांगा जवाब

जयपुर में कमर्शियल एरिया में चल रहे कोचिंग संस्थानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने JDA से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है और कोचिंग शिफ्टिंग व मास्टर प्लान के पालन को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है।
2 min read
• •
Updated: 6 Aug 2026, 5:04 PM IST
Supreme Court
Supreme Court

जयपुर में कमर्शियल एरिया में चल रहे कोचिंग संस्थानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि जब कोचिंग संस्थानों को शिफ्ट करने के लिए अलग भवन पहले से बने हुए हैं, तो वे अब भी कमर्शियल इलाकों से क्यों चल रहे हैं। कोर्ट ने JDA से कहा है कि वह तीन हफ्ते के अंदर बताए कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और आगे समस्या दूर करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बताया कि सरकार ने कोचिंग संस्थानों को स्थानांतरित करने के लिए विशेष बहुमंजिला भवन बनवाए हैं। इसके बावजूद कई कोचिंग संस्थान अब भी कमर्शियल इलाकों में चल रहे हैं। इतना ही नहीं, जिन भवनों का उपयोग कोचिंग शिफ्टिंग के लिए होना था, उनका आवंटन दूसरी संस्थाओं को किया जा रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। लेकिन साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसे आवंटन मान्य नहीं होंगे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो भी अंतिम फैसला आएगा, वही मान्य होगा। तब तक किसी को भी इन भवनों पर स्थायी हक नहीं मिलेगा।

जयपुर के मास्टरप्लान से संबंधित मुद्दे भी उठे

सुनवाई के दौरान जयपुर के मास्टरप्लान से संबंधित मुद्दे भी उठे। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि कई जगहों पर जिस जमीन का इस्तेमाल एक खास काम के लिए होना था, वहां दूसरे काम किए जा रहे हैं। वहीं लोगों ने जो जमीन JDA को सौंपी थी, उसका भी सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहा। कई जगहों पर अतिक्रमण की शिकायतें भी सामने आई हैं। कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति चिंताजनक है।


साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने JDA की कार्रवाई से जुड़े मामलों में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने अपीलीय प्राधिकरण को निर्देश दिया कि ऐसे सभी मामलों का दो सप्ताह के भीतर निपटारा किया जाए। साथ ही तय समयसीमा का पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित पीठासीन अधिकारी की होगी।

कैसे सामने आया यह मुद्दा?

यह मामला एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) में दायर आवेदन की सुनवाई के दौरान सामने आया। इसमें आरोप लगाया गया था कि भूमि उपयोग के नियमों और भवन कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है और मास्टर प्लान का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे पहले 25 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट इस मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा चुका है और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को इसमें पक्षकार बनाने का निर्देश दे चुका है।

Updated on:
6 Aug 2026, 5:04 PM IST
Published on: