
जयपुर: रावण के पुतले बनाते वक्त मांगीलाल की नजर बार-बार आसमान की ओर उठ जाती हैं। उन्हें पिछले साल की वह बारिश याद है, जिसने देखते ही देखते महीनों की मेहनत मिट्टी में मिला दी थी। नुकसान इतना बड़ा था कि आज तक कर्ज नहीं उतर पाया। लेकिन पेट और परिवार की जिम्मेदारियां इंतजार नहीं करतीं, इसलिए पत्नी बग्गी देवी के साथ उन्होंने फिर हिम्मत जुटाई, उधार लिया और 250 रावण तैयार कर दिए।
दशहरे की तैयारियों के बीच मूल रूप से जालोर जिले के भीनमाल निवासी यह परिवार सिर्फ बिक्री के लिए प्रार्थना नहीं कर रहा, बल्कि बादलों से भी रहम की उम्मीद लगाए बैठा है। उनका सपना बहुत बड़ा नहीं है, बस मेहनत बच जाए और कर्ज थोड़ा कम हो जाए। उनके लिए दशहरा सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि सालभर की आर्थिक जरूरतें पूरी करने का मौका है।
परिवार के मुताबिक, वे अब तक मूलधन के बराबर रकम ब्याज के रूप में चुका चुके हैं, लेकिन मूलधन अब भी बाकी है। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इस बार फिर एक लाख रुपए उधार लेकर 250 रावण तैयार किए हैं। पिछले एक महीने से करीब 20 लोग इस काम में लगे हैं। अब उम्मीद है कि मेहनत रंग लाएगी और परिवार को कुछ राहत मिलेगी।
रावण बनाने वाले कलाकारों की सबसे बड़ी परेशानी सुरक्षित जगह का अभाव है। पुतले खुले में रखने पड़ते हैं। बारिश से बचाने के लिए प्लास्टिक का सहारा लेते हैं, लेकिन नुकसान का डर बना रहता है। मौसम विभाग ने जयपुर में शुक्रवार को गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है। मांगीलाल और बग्गी देवी की सरकार से गुहार है कि रावण बनाने और तैयार पुतलों को सुरक्षित रखने के लिए जगह और शेड की व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश में महीनों की मेहनत बर्बाद न हो और पुश्तैनी कला से जुड़े परिवारों को राहत मिल सके।
मानसरोवर, सांगानेर, बीटू बाइपास, कालवाड़ रोड, गुर्जर की थड़ी, शास्त्री नगर, सोडाला और दिल्ली रोड सहित कई स्थानों पर रावण की मंडियां सजने लगी हैं।