
Jaipur : जयपुर शहर की सड़कों पर बेसहारा पशुओं और मवेशियों का आतंक आम है। ऐसे ही बेसहारा सांड की टक्कर से मौत मामले में एडीजे कोर्ट-8 जयपुर महानगर द्वितीय ने नगर निगम, जिला कलेक्टर व स्वायत्त शासन सचिव को जिम्मेदार माना है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि वे मृतक के आश्रितों को क्षतिपूर्ति की राशि 61.35 लाख रुपए 4 अप्रेल 2023 से छह फीसदी साधारण ब्याज सहित दें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शहर की जनता को बेसहारा पशुओं के आतंक से निजात दिलाना और सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन व नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिससे वे ठेकेदार के नाम पर अपने दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ सकते।
ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में 13 नवंबर 2022 को सायं करीब 6.30 बजे रामगढ़ मोड़ चौराहे पर 53 वर्षीय गिर्राज प्रसाद शर्मा अपने गांव जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे। तभी अचानक पीछे से बेसहारा सांड ने आकर उन्हें जोरदार टक्कर मारी। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मृतक के आश्रितों ने नगर निगम, जिला कलक्टर जयपुर व स्वायत्त शासन सचिव को पक्षकार बनाते हुए उनके खिलाफ क्षतिपूर्ति का दावा किया।
जयपुर नगर निगम ने कोर्ट में कहा कि मृत व्यक्ति की मौत किसी वाहन की टक्कर से हुई है। निगम ने बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए प्राइवेट ठेकेदार को काम सौंपा हुआ है, इसलिए निगम सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि केवल प्राइवेट ठेकेदार को नियुक्त कर देने मात्र से नगर निगम अपने विधिक दायित्वों और जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकता। एक परिवार के मुखिया, कमाने वाले की अकाल मृत्यु से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि बच्चों का स्नेह और वात्सल्य भी छिन जाता है।
अतिरिक्त जिला न्यायालय क्रम-3 जयपुर जिला ने सांड की टक्कर से व्यक्ति की मौत के मामले में नगर निगम, जयपुर और मानसरोवर जोन पर पांच लाख रुपए का हर्जाना लगाया है. अदालत ने नगर निगम को यह भी आदेश दिए हैं कि वह हर्जाना राशि पर दावा पेश करने की तिथि से छह फीसदी ब्याज भी मृतक के आश्रितों को अदा करे. अदालत ने यह आदेश ऋषि देवी व अन्य की ओर से दायर दावे पर सुनवाई करते हुए दिया था।
जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं से होने वाले हादसों पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा पशुओं को नेशनल हाईवे, सड़कों और गलियों में यूं ही नहीं छोड़ सकते। वे नेचुरल स्पीड ब्रेकर नहीं हैं। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों से ऐसे हादसों के पीड़ितों को मुआवजा देने का नियम बनाने को कहा। साथ ही सुझाव दिया कि जरूरत हो तो इसके लिए कानूनों और नियमों में संशोधन भी किया जाए।