जयपुर

Jaipur: शव की शिनाख्त में चूक; जिसे दफनाया वो मिली जिंदा, 10 साल बाद आरोपित बरी

Jaipur Agra Highway Case: अपर सेशन न्यायाधीश बस्सी संजय कुमार मीना ने करीब 10 साल पुराने जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित जटवाड़ा एक फैक्ट्री के सामने ट्रक की खिड़की में चुन्नी से लटके मिले महिला के शव प्रकरण में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपित को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
2 min read
Jun 25, 2026
Woman Found Alive
बस्सी पुलिस स्टेशन, पत्रिका फाइल फोटो

Jaipur Agra Highway Case: अपर सेशन न्यायाधीश बस्सी संजय कुमार मीना ने करीब 10 साल पुराने जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित जटवाड़ा एक फैक्ट्री के सामने ट्रक की खिड़की में चुन्नी से लटके मिले महिला के शव प्रकरण में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपित को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वहीं न्यायालय ने तत्कालीन थानाप्रभारी मुकेश चौधरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए शव का डीएनए परीक्षण नहीं कराने और मृतका की सही पहचान नहीं करने को लेकर जांच के आदेश दिए है।

न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक जयपुर को निर्देशित किया कि मामले की विस्तृत जांच कर 3 माह में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए व दोषी पाए जाने पर संबंधित जांच अधिकारी के खिलाफ आपराधिक अनुशासनात्मक कार्रवाई जाए।

यह था पूरा मामला

प्रकरण के अनुसार 19 जून 2016 को भरतपुर जिले के जुरहरा थाना क्षेत्र के गांव अहलवाड़ी निवासी सुभान खां ने जयपुर जिले के बस्सी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी की कि 8 जून 2016 की रात उसके भतीजे रहीश की पत्नी फरजाना घर से लापता हो गई। परिजनों ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

17 जून 2016 को सूचना मिली कि जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर जटवाड़ा में एक फैक्ट्री के सामने ट्रक की खिड़की पर चुन्नी से फंदा लगी एक महिला का शव मिला है। परिजन मौके पर पहुंचे और शव की शिनाख्त फरजाना के रूप में कर गांव ले जाकर दफना दिया। पुलिस ने मामले में शाबुद्दीन के खिलाफ चालान पेश किया।

मामले में आया नया मोड़

सुनवाई के दौरान मामला तब उलझ गया, जब यह तथ्य सामने आया कि मृतका फरजाना नहीं, बल्कि हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले के फिरोजपुर थाना क्षेत्र के सिधरावट गांव निवासी नजमा पत्नी नवाब थी। नजमा के पति ने न्यायालय में बताया कि उसे बस्सी थाने से पत्नी की मौत की सूचना मिली थी, लेकिन जब वह पहुंचा तो शव पहले ही किसी अन्य परिजन की ओर से ले जाकर दफनाया जा चुका था।
नजमा के परिजनों ने आरोप लगाया कि शाबूद्दीन ने नजमा का अपहरण कर उसकी हत्या की। बाद में पुलिस जांच में यह सामने आया कि अहलवाड़ी गांव के लोग नजमा के शव को फरजाना समझकर ले गए थे और उसको दफना भी दिया।

कोर्ट ने जताई नाराजगी

न्यायालय ने टिप्पणी की है कि पुलिस ने मामले में न तो शव का डीएनए परीक्षण कराया और न ही मृतका की सही पहचान की। यह गंभीर लापरवाही है। इसी आधार पर आरोपित शाबूद्दीन उर्फ तैयब उर्फ साबू पुत्र इस्लाम निवासी सरपंच घोड़ाकाबास थाना किशनगढ़वास, अलवर को संदेह का लाभ देते हुए 19 जून 2026 को बरी कर दिया।

इनका कहना है…

आरोपित को सजा नहीं मिलने के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी, ताकि दोषी को सजा दिलाई जा सके। इस मामले में पुलिस ने भी गम्भीर लापरवाही बरती है।
मनीष कुमार शर्मा, लोक अभियोजक

Published on:
25 Jun 2026 01:21 pm