जयपुर के जगतपुरा आरटीओ में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑटोमेटेड ट्रायल सिस्टम फिर शुरू किया गया है। अब ट्रायल पूरी तरह सॉफ्टवेयर से होगा और जुगाड़ नहीं चलेगा। टेस्ट का रिजल्ट तुरंत मिलेगा। हालांकि, शुल्क बढ़ने और शहर में दो अलग-अलग ट्रायल सिस्टम को लेकर लोगों में असमंजस है।
जयपुर: अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। राजधानी के जगतपुरा आरटीओ कार्यालय में परिवहन विभाग ने ऑटोमेटेड ट्रायल सिस्टम दोबारा शुरू कर दिया है। यानी अब न पहचान चलेगी और न जुगाड़ काम आएगा।
बता दें कि ड्राइविंग लाइसेंस उसी को मिलेगा, जो सच में गाड़ी चलाना जानता है। विभाग के इस कदम को सड़क सुरक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही आम जनता के सामने कुछ नए सवाल और परेशानियां भी खड़ी हो गई हैं।
परिवहन विभाग ने सोमवार से जगतपुरा आरटीओ में ऑटोमेटेड ट्रैक पर स्थाई लाइसेंस का ट्रायल लेना शुरू कर दिया है। अभी इसे दो-तीन दिन ट्रायल बेस पर चलाया जा रहा है। लेकिन आवेदकों को टेस्ट पूरी तरह ऑटोमेटेड ट्रायल सिस्टम पर ही देना होगा। वाहन चालक के ट्रायल की हर गतिविधि सॉफ्टवेयर के जरिए रिकॉर्ड होगी और ट्रायल के तुरंत बाद परिणाम प्रिंट होकर मिल जाएगा।
जल्द ही इस सिस्टम को वाहन पोर्टल से जोड़ दिया जाएगा, जिसके बाद ट्रायल का रिजल्ट सीधे आवेदक के मोबाइल पर मैसेज के जरिए पहुंचेगा। इससे परिवहन निरीक्षकों की भूमिका लगभग खत्म हो जाएगी और एजेंटों का दखल भी बंद होगा।
शहर में लाइसेंस के लिए दो अलग-अलग तरीके क्यों?
जनता के नजरिए से देखें तो यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने वाली जरूर है। लेकिन पूरी तरह परेशानी-मुक्त नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही शहर में लाइसेंस के लिए दो अलग-अलग तरीके क्यों? जहां जगतपुरा में ऑटोमेटेड ट्रायल सिस्टम लागू किया गया है। वहीं, विद्याधर नगर आरटीओ में अब भी मैनुअल ट्रायल ही होंगे। ऐसे में आशंका है कि जो लोग ऑटोमेटेड ट्रायल से बचना चाहेंगे, वे विद्याधर नगर या आसपास के डीटीओ कार्यालयों का रुख करेंगे।
आम लोगों की एक और चिंता खर्च को लेकर है। ऑटोमेटेड ट्रायल शुरू होने के साथ ही स्थायी लाइसेंस के शुल्क में 250 रुपए की बढ़ोतरी हो गई है। अब पुरुष आवेदकों को 800 की जगह 1050 रुपए और महिला आवेदकों को 700 की जगह 950 रुपए देने होंगे। पहले से महंगाई से जूझ रही जनता के लिए यह अतिरिक्त बोझ कम नहीं है। लोगों का सवाल है कि जब सिस्टम डिजिटल और ऑटोमेटेड हो रहा है, तो फीस घटने के बजाय बढ़ क्यों रही है?
गौरतलब है कि जगतपुरा आरटीओ में पहले भी ऑटोमेटेड ट्रायल सिस्टम लागू था। लेकिन तकनीकी खामियों के चलते अप्रैल 2024 में इसे बंद कर मैनुअल ट्रायल शुरू कर दी गई थी। अब करीब एक साल बाद इसे फिर से शुरू किया गया है।