
Rajasthan Road Accident: जयपुर: जगतपुरा पुलिया के पास एक तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से दो सहेलियों सुगना देवी और सुनीता बैरवा की मौत को 41 दिन बीत चुके हैं। हादसे के जिम्मेदार चालक तक पुलिस अब भी नहीं पहुंच सकी है। इस मामले का सबसे दुखद पहलू यह है कि जो काम पुलिस को करना चाहिए था, वह अब इंसाफ की आस में भटक रहे मृतक महिलाओं के परिजन खुद कर रहे हैं।
हादसे के बाद जगतपुरा स्थित पूनम विहार निवासी दोनों मृतक महिलाओं के परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि आखिर उनकी खुशियां छीनने वाला हत्यारा चालक कौन है? जब परिजन सुराग ढूंढ़ने घटना स्थल पर पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि उस महत्वपूर्ण रूट पर लगे सरकारी कैमरे बंद पड़े थे।
इसके बाद भी परिवार ने हिम्मत नहीं हारी और खुद ही जांच की राह तैयार करने का फैसला किया। परिजन घर-घर, कॉलोनी और दुकानों पर गए और निजी स्तर पर लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया।
खंगाला पूरा रूटः परिजन ने महल रोड के 7 नंबर बस स्टैंड से लेकर मालवीय नगर बालाजी मोड़ तक दर्जनों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज जुटाए। कई कैमरों में काल बनकर आई वह तेज रफ्तार बाइक दिखाई भी दी, लेकिन गति इतनी तेज थी कि नंबर प्लेट साफ पढ़ी नहीं जा सकी।
320 बाइकों का निकाला रिकॉर्ड: नंबर न दिखने पर भी परिजन ने हार नहीं मानी। फुटेज में दिखे बाइक के मॉडल और रंग के आधार पर वे आरटीओ कार्यालय पहुंचे। वहां से उन्होंने रिकॉर्ड निकलवाया, जिससे पता चला कि जयपुर में उस विशिष्ट कंपनी और रंग की कुल 320 बाइक पंजीकृत हैं।
मृतका के परिजन किशनलाल बैरवा ने बताया कि वे कड़ी मेहनत और छानबीन कर जुटाई गई पूरी जानकारी व 320 बाइकों की सूची पुलिस को सौंप चुके हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि पुलिस इन बाइक्स के मालिकों को थाने बुलाकर कड़ाई से पूछताछ करे, तो आरोपी तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
लेकिन अफसोस, पुलिस इस पुख्ता सुराग के बावजूद हाथ पर हाथ धरे बैठी है। नतीजा यह है कि अपनों को खो चुका यह परिवार पिछले 41 दिनों से इंसाफ के लिए थानों और दफ्तरों की चौखट पर चक्कर लगा रहा है। अब देखना यह है कि परिजन के इस प्रयास के बाद भी पुलिस की नींद टूटती है या इंसाफ का रास्ता यूं ही बंद रहेगा।
परिवार के साथ सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने में साथ रहा। तकनीकी आधार पर भी बाइक की तलाश की जा रही है। कई बार अन्य ड्यूटी और मामले आने पर वहां व्यस्त हो जाते हैं। बाइक के नंबर स्पष्ट नहीं है और स्पेशल टीम की मदद से लगातार तलाश में जुटा हूं।
-सुरेंद्र, अनुसंधान अधिकारी, रामनगरिया थाना