जयपुर

पढ़ाई बाद में कराना गुरुजी… SIR ड्यूटी पूरी होने के बाद अब शिक्षकों के लिए नया काम ले आई सरकार… नई ड्यूटी शुरू

Education News Jaipur: शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का पुरजोर विरोध किया है। संगठनों का तर्क है कि मार्च और अप्रैल का महीना शैक्षणिक सत्र का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है।
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Mar 07, 2026
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बच्चे खेलते हुए और गुरुजी दूसरे काम करते हुए, एआई की मदद से तैयार तस्वीर, फोटो-पत्रिका

Teachers Census Duty Jaipur: राजस्थान में शिक्षकों के लिए सरकार ने नया काम खोज निकाला है। शिक्षण के अलावा अब शिक्षकों को जनगणना के लिए भी काम में लेना शुरू कर दिया गया है। इससे पहले उनकी एसआईआर ड्यूटी जैसे-तैसे पूरी हुई थी। बताया जा रहा है कि जयपुर के करीब एक हजार शिक्षकों को तो इस काम में लगा ही दिया गया है, जबकि सरकारी विद्यालयों में अभी बोर्ड की परीक्षाओं के साथ ही अन्य वार्षिक परीक्षाएं भी जारी है और इस बीच इन परीक्षाओं में ड्यूटी देना सबसे ज्यादा जरूरी है। वार्षिक परीक्षाओं के महत्वपूर्ण समय में शिक्षकों को गैर.शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से विवाद गहरा गया है।

हजार से अधिक शिक्षकों की लगी ड्यूटी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर जिले के 1000 से अधिक शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य के लिए लगा दी गई है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षाओं की तैयारियां चरम पर हैं। शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय प्रशासनिक कार्यों में उलझाया जा रहा है।

परीक्षा और रिजल्ट पर संकट के बादल

शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का पुरजोर विरोध किया है। संगठनों का तर्क है कि मार्च और अप्रैल का महीना शैक्षणिक सत्र का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है।

  • वार्षिक परीक्षाएं: ड्यूटी के कारण कक्षाओं में रिवीजन और परीक्षाओं का संचालन प्रभावित होगा।
  • परीक्षा परिणाम: शिक्षकों के जनगणना में व्यस्त होने से रिजल्ट तैयार करने में देरी हो सकती है।
  • नया सत्र: यदि समय पर रिजल्ट नहीं आया, तो 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) की शुरुआत भी प्रभावित होगी।"शिक्षक पढ़ाने के अलावा और क्या-क्या करें?"सोशल मीडिया और शिक्षक समूहों में यह सवाल तेजी से गूंज रहा है— "शिक्षक पढ़ाने के अलावा और क्या-क्या करें?"। शिक्षकों का कहना है कि बीएलओ ड्यूटी, एसआईआर ड्यूटी और अब जनगणना के कारण वे साल भर स्कूल से बाहर ही रहते हैं। इससे न केवल छात्रों की पढ़ाई का नुकसान होता है, बल्कि शिक्षकों पर भी मानसिक दबाव बढ़ता है।
  • एजेंसी से काम कराने की मांगविरोध दर्ज कराते हुए विभिन्न शिक्षक संगठनों ने सरकार और संबंधित एजेंसी से मांग की है कि जनगणना जैसे कार्यों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। संगठनों का सुझाव है कि इसके लिए किसी अलग एजेंसी या बेरोजगार युवाओं की मदद ली जानी चाहिए, ताकि शिक्षकों का पूरा ध्यान केवल शिक्षा और आगामी परीक्षाओं पर केंद्रित रह सके।फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन शिक्षकों के इस कड़े रुख से आगामी परीक्षाओं के आयोजन पर संशय बना हुआ है।
Updated on:
07 Mar 2026 08:40 am
Published on:
07 Mar 2026 08:39 am