Jaipur Infrastructure Projects: धूरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, ट्रैफिक जाम और जलभराव से जूझ रही राजधानी जयपुर की जनता के लिए राहत की खबर है।
जयपुर। अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, ट्रैफिक जाम और जलभराव से जूझ रही राजधानी जयपुर की जनता के लिए राहत की खबर है। अब फंड की कमी जयपुर के विकास की राह में बड़ी बाधा नहीं रहेगी। केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) के जरिए शहर के बड़े प्रोजेक्ट्स को वित्तीय संबल मिलने की संभावना है। शर्त सिर्फ इतनी है कि राजस्थान सरकार, विकास प्राधिकरण और शहरी सरकारें मजबूत प्लानिंग के साथ प्रभावी डीपीआर तैयार कर केंद्र के सामने पेश करें।
जयपुर में एलिवेटेड रोड, फ्लाईओवर, इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम और ड्रेनेज सुधार जैसे कई प्रोजेक्ट लंबे समय से पाइपलाइन में हैं। आर्थिक तंगी की वजह से ये बेहद धीमी गति से चलते हैं। यूसीएफ मॉडल इन प्रोजेक्ट्स को गति दे सकता है।
जेडीए अधिकारियों की मानें तो झालाना बाइपास और द्रव्यवती नदी पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड की डीपीआर बननी है। इन दोनों को इस परियोजनाओं के साथ-साथ शहर के बाहरी इलाकों में सीवर लाइन के काम का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेज दिया है। वहां से केंद्र के पास फंड की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे।
जेडीए सूत्रों की मानें तो द्रव्यवती नदी के बहाव क्षेत्र में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को भी इसी फंड से विकसित करने पर काम कर रहा है। दरअसल, इसे बनाने में करीब 6 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। सब कुछ प्लान के मुताबिक हुआ तो यूसीएफ के तहत ये प्रोजेक्ट जमीन पर आएगा।
-एलिवेटेड रोड (अजमेर रोड और सीकर रोड)
-बड़े चौराहों पर फ्लाईओवर
-स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम
-मेट्रो-बस इंटीग्रेशन
-ग्रीन कॉरिडोर और सोलर प्रोजेक्ट
-ट्रैफिक और जलभराव
यूसीएफ केंद्र सरकार की एक प्रतिस्पर्धात्मक फंडिंग व्यवस्था है। शहरों को उनके प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता, नवाचार और प्रभाव के आधार पर पैसा दिया जाता है। यह फंड मुख्य रूप से शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट, ड्रेनेज और सस्टेनेबल डेवलपमेंट से जुड़े कार्यों में खर्च होगा। शहरों को डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट नगर शहरी एवं आवासन मंत्रालय भिजवानी होगी। वहां उसका मूल्यांकन होता है। चयनित प्रोजेक्ट्स को चरणबद्ध तरीके से केंद्रीय सहायता मिलेगी।
-01 लाख करोड़ रुपए केंद्र सहायता देगा इस व्यवस्था में (2025-26 से 2023-31 तक)
-04 लाख करोड़ रुपए निवेश की संभावना है कि अगले पांच वर्षों में देश के शहरी क्षेत्रों में
ये होगा फंडिंग पैटर्न
-25 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार (यूसीएफ) से
-50 प्रतिशत राशि बाजार (मार्केट) से जुटानी होगी
-25 प्रतिशत राज्य सरकार या शहरी निकाय से