Jaipur Literature Festival: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि तीसरा विश्व युद्ध संभव नहीं, इसे कोई सहन नहीं कर सकता। भारत ‘विश्व गुरु’ नहीं बल्कि ‘विश्व मित्र’ बन सकता है। उन्होंने जाति-धर्म की दीवारें तोड़ने, करुणा और मानवीय मूल्यों पर आधारित विकास का आह्वान किया।
Jaipur Literature Festival 2026: तीसरा विश्व युद्ध नहीं होगा, इसको बर्दाश्त करने की क्षमता किसी की भी नहीं है। मैं बार-बार यह कहता आया हूं कि केवल ताकत, दौलत, हथियार या तकनीक से कोई भी देश ‘विश्व गुरु’ नहीं बन सकता है। अगर ऐसा होता तो अमेरिका हमेशा विश्व गुरु रहता। क्योंकि उससे ज्यादा ताकतवर, अमीर और तकनीकी रूप से उन्नत देश शायद ही कोई होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। यह कहना है नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का।
बता दें कि कैलाश सत्यार्थी शुक्रवार को गुलाबी नगर में आयोजित हो रहे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होने आए। राजस्थान पत्रिका से खास बातचीत में सत्यार्थी ने कहा कि भारत सबसे पहले ‘विश्व मित्र’ बन सकता है। क्योंकि भारत के डीएनए में ही विश्व मित्रता का भाव है। हम दूसरों की तकलीफ को अपनी पीड़ा समझते हैं और उसे दूर करने का प्रयास भी करते हैं।
सत्यार्थी ने कहा कि समाज है तो गंदगी भी होगी, दुनिया है तो अंधेरा भी होगा। लेकिन हम विकल्प या समाधान बनकर निकले ये बहुत जरूरी है। मेरी बुक ‘करुणा’ में लिखा है कि मैं ऐसी दुनिया का सपना देखता हूं, जिसमें केवल विश्व नागरिकता हो।
उन्होंने कहा कि हमने इतिहास में, सभ्यता के विकास में, मनुष्यता के विकास में जात-पात, राष्ट्र और धर्म-मजहब की दीवारें खड़ी कर दी। दुनिया बहुत बिखरी हुई है। मैं ऐसी दुनिया की कल्पना करता हूं, जहां ऐसी दीवारें न हों, जिनका चरित्र ऊंचा होता है। उनके लिए पूरा विश्व एक परिवार होता है। उन्होंने कहा कि हम सब साथ चलेंगे, तभी सच्चा विकास होगा।
ग्लोबल वार्मिंग को लेकर उन्होंने कहा कि हर कोई देश कह रहा है कि हमें विकसित होना है। इसके लिए ज्यादा कमाई होना जरूरी है, ताकि जीडीपी ज्यादा हो सके। ऐसे में ज्यादा इंडस्ट्री लगानी होगी और धरती का खनिज पदार्थ कम हो जाएगा।
मेरा मानना है कि इंडस्ट्रीलाइजेशन (औद्योगीकरण) जितना ज्यादा होगा, ग्लोबल वार्मिंग और कलाइमेंट क्राइसिस होंगे। आज दुनिया जितनी अमीर और ज्ञानवान है, पहले कभी नहीं थी। लेकिन आज दुनिया जितनी टूटी-बिखरी और जितनी घृणा-हिंसा है, पहले कभी नहीं थी। इसका समाधान भारत की धरती से नहीं निकलेगा, तो कहीं से भी नहीं निकलेगा।
उन्होंने कहा कि युवाओं को 3डी (ड्रीम, डिस्कवर और डू) पर फोकस करने की सलाह देता हूं। हमेशा बड़े सपने देखो। सबको सपने देखने की और विचारों की आजादी है। विचार जितने स्वतंत्र होंगे, आप उतने ही ज्यादा प्रगति करेंगे। सपने बड़े होंगे तो आप भी आगे बढ़ेंगे। साथ ही अपने भीतर की संभावनाओं और ताकत को तलाशना जरूरी है।
अपनी उम्र को लेकर सत्यार्थी ने कहा कि मेरे लिए आयु सिर्फ एक नंबर है। भीतर की सोच सबसे महत्वपूर्ण है। नौजवनों को कहता रहता हूं कि जिसमें सवाल उठाने की हिम्मत/साहस है और हल निकालने का हौसला है, वे कभी बूढ़े नहीं होते हैं।