
जयपुर: शहरी निकायों में महिला पार्षदों की जगह उनके पति या रिश्तेदारों के निकाय बैठकों में पहुंचने का मुद्दा गुरुवार को भी चर्चा में रहा। जयपुर नगर निगम मुख्यालय में सिविल लाइंस जोन की समीक्षा बैठक से पहले महापौर सुनील कोठारी ने इस पर नाराजगी जताई। बैठक के दौरान उन्होंने तीन बार स्पष्ट कहा कि यदि किसी महिला पार्षद के पति या रिश्तेदार बैठक में मौजूद हैं, तो वे बाहर निकल जाएं। इस घटनाक्रम ने शहरी निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्र भूमिका और भागीदारी को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
बस्सी नगरपालिका की साधारण सभा में चेयरमैन निर्मला खोलिया सहित सभी महिला पार्षद मौजूद रहीं। खास बात यह रही कि उनके पति या परिजन सभागार और परिसर में भी नजर नहीं आए। इसे राजस्थान पत्रिका के अभियान के असर के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, करौली नगरपरिषद की सभा में भी महिला पार्षदों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। यहां 24 में से 23 महिला पार्षद बैठक में पहुंचीं।
उदयपुर नगर निगम में कुल 80 पार्षद हैं, जिनमें 27 महिलाएं हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें 17 महिला पार्षद सक्रिय हैं, जबकि 10 के काम उनके पति संभाल रहे हैं। ये पति अधिकारियों से संपर्क करने और वार्ड से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहते हैं। इससे निर्वाचित महिला पार्षदों की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और उनकी जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जोधपुर नगर निगम में 100 पार्षदों में से 34 महिलाएं हैं। जोधपुर और फलोदी जिले की चार नगर पालिकाओं में महिला अध्यक्ष हैं। हालांकि, कई वार्डों में महिला पार्षदों के बजाय उनके परिजनों के कामकाज संभालने की बात सामने आई है। ऐसे मामलों में महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक भागीदारी और निर्णय लेने में उनकी भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।