
Jaipur Neeraj Sharma murder Case Accused Ayushi: जयपुर: कहा जाता है कि कानून की पढ़ाई करने वाले समाज को न्याय दिलाते हैं और अपराध की बारीकी समझ रखते हैं, ताकि न्याय की रक्षा हो सके। लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में कानून के दो विद्यार्थियों ने अपनी इसी समझ का इस्तेमाल न्याय के लिए नहीं, बल्कि एक खूनी और रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश रचने के लिए किया।
जयपुर के प्रतापनगर इलाके में हुए बहुचर्चित 'नीरज शर्मा हत्याकांड' ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य अपराध की मुख्य सूत्रधार कोई और नहीं बल्कि मृतका नीरज शर्मा की 23 वर्षीय सगी बेटी आयुषी शर्मा है, जो एलएलबी फाइनल ईयर की छात्रा है। इस खूनी कहानी को लिखने में उसका साथ दिया उसके चचेरे भाई बलराम शर्मा ने, वह कानून (LLB) की पढ़ाई कर चुका है। दोनों ने मिलकर अपनी ही मां को मौत के घाट उतारने के लिए 7 लाख रुपए की सुपारी दे डाली।
आयुषी शर्मा और उसका चचेरा भाई बलराम दोनों टोंक रोड स्थित एक मकान में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। दोनों ही एलएलबी के छात्र होने की वजह से कानूनी दांव-पेंचों से अच्छी तरह वाकिफ थे। पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई है कि दोनों ने अपनी कानूनी जानकारी का इस्तेमाल पुलिस को गुमराह करने और अपराध को एक सामान्य (सड़क हादसा) का रूप देने के लिए किया था। उन्होंने सोचा था कि वे कानून की कमियों का फायदा उठाकर आसानी से बच निकलेंगे, लेकिन कानून के रक्षकों के सामने उनकी यह शातिराना कहानी टिक नहीं सकी।
पुलिस की तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी भी इंसान का दिल दहला देने के लिए काफी हैं। आयुषी ने पुलिस को बताया कि वह अपनी मां नीरज शर्मा (45) से बेहद नफरत करती थी। उसका मानना था कि उसकी मां उसके मानसिक रूप से बीमार भाई को ज्यादा प्यार करती थी, जिससे वह खुद को परिवार में अकेला महसूस करती थी।
लेकिन इस नफरत के पीछे असली खेल पैसे, प्रॉपर्टी और पावर का था। आयुषी के पिता विजय कुमार शर्मा की मौत के बाद परिवार में विवाद गहरा गया। परिवार के पास करीब 14 से 15 करोड़ रुपए की बेहिसाब संपत्ति थी। इसके साथ ही, आयुषी चाहती थी कि उसे अपने पिता की जगह अदालत में 'अनुकंप नौकरी' मिल जाए। लेकिन उसकी मां नीरज शर्मा खुद उस सरकारी नौकरी पर लग गईं, ताकि वह अपने बेटे का भरण-पोषण कर सकें। बस इसी बात से नाराज होकर आयुषी अपनी मां की जान की दुश्मन बन बैठी।
करीब एक महीने पहले आरोपियों ने नीरज शर्मा को महिंद्रा थार गाड़ी से कुचलकर मारने की कोशिश की थी, लेकिन वे उस समय नाकाम रहे। 27 जून को आयुषी ने अपनी मां और भाई को घर के अंदर ही जिंदा जलाकर मारने का प्लान बनाया। वह खुद बहाना बनाकर सांगानेर चली गई और उसके पीछे से भाड़े के शूटर आकाश ने घर के बाहर से जलते हुए कपड़ों के गुच्छे और पेट्रोल बम फेंके। हालांकि, सीढ़ियों में आग लगने के बावजूद उसका भाई और मां बाल-बाल बच गए।
अंततः 3 जुलाई को आयुषी और बलराम की साजिश कामयाब रही। उन्होंने 7 लाख रुपए की सुपारी देकर एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो गाड़ी से नीरज शर्मा को कुचलवा दिया। शुरुआती तौर पर पुलिस इसे सड़क दुर्घटना मान रही थी, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स ने इस पूरे मामले से पर्दा उठा दिया।
मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब मृतका नीरज शर्मा के भाई (आयुषी के मामा) राकेश शर्मा ने पुलिस को एक लिखित ज्ञापन सौंपा। मामा का आरोप है कि परिवार में यह पहली संदिग्ध मौत नहीं है। अप्रैल 2025 में आयुषी के पिता विजय कुमार शर्मा की मौत भी सामान्य नहीं थी।
आरोप के मुताबिक, विजय शर्मा लंबे समय से बीमार थे और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आयुषी और बलराम उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले गए और तीन महीने तक परिवार से छिपाकर रखा। बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें दोबारा भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
परिजनों का संगीन आरोप है कि आयुषी ने अपने पिता की 'फीडिंग ट्यूब' निकाल दी थी जिससे उनकी मौत हुई। मामा राकेश शर्मा ने बताया कि मां से विवाद के दौरान आयुषी ने नीरज शर्मा को धमकी भी दी थी कि जब पिता की खाने की पाइप निकालकर उन्हें मार दिया, तो तुम क्या हो, तुम्हें भी दो दिन में खत्म कर दूंगी। इस धमकी के बाद नीरज शर्मा ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर लिखा था कि उनकी जिंदगी सिर्फ दो दिन की बची है।
जयपुर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मामले में मुख्य आरोपी आयुषी शर्मा, उसके चाचा मोहन स्वरूप सहित सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आयुषी बेहद शातिर दिमाग की है और पूछताछ में कई बार पूरी तरह शांत हो जाती है।
वहीं, इस पूरी साजिश का सहयोगी और मुख्य आरोपी बलराम शर्मा अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस अब मां की हत्या के साथ-साथ पिता की मौत के एंगल और 15 करोड़ की संपत्ति के दस्तावेजों की भी गहनता से जांच कर रही है।