जयपुर

ग्रेटर नगर निगम की ग्रेट स्टोरी : 8.55 करोड़ का जुर्माना लगाया, इनाम में मिला ट्रांसफर

उपायुक्त और आरओ के तबादले के पीछे की सियासत     —सीएमओ के निर्देश पर निगम ने की थी एसीटी पर कार्रवाई

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Oct 04, 2021


जयपुर। शहरी निकायों में राज्य सरकार का दखल कितना है, इसका अंदाजा ग्रेटर निगम में हुए दो तबादलों से लगाया जा सकता है। एक अक्टूबर को राजस्व शाखा के उपायुक्त नवीन भारद्वाज और आरओ मोनिका सोलंकी का तबादला कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण पर दोनों में से कोई भी बोलने को तैयार नहीं है।
इसके पीछे सियासय ही मानी जा रही है। क्योंकि इंटरनेट प्रदाता कम्पनी एसीटी पर लगातार बकाया को जमा कराए जाने का निगम प्रशासन की ओर से दबाव बनाया जा रहा था। इसके बाद भी कम्पनी पैसा जमा करने को तैयार नहीं थी।
दरअसल, एसीटी पर निगम ने 8.55 करोड़ का जुर्माना लगाया था। 17 दिसम्बर, 2020 को निगम ने कम्पनी को मांग पत्र भेजा। इसके बाद से ही कम्पनी जमा करने में आनाकानी कर रही थी और निगम के आलाधिकारी चुपी साधे हुए हैं।


750 पोल की अनुमति ले कई जगह बिछा दी लाइन
कम्पनी की मनमानी जुलाई, 2018 में आवेदन करने के साथ ही शुरू हो गई थी। आवेदन करने के साथ ही कम्पनी ने काम शुरू कर दिया, जबकि निगम ने एनओसी 26 मार्च, 2019 को दी थी। उस समय महज 750 पोल पर लाइन डालने की अनुमति ली थी। हाल ही में निगम ने जो सर्वे किया है, उस पर गौर करें तो आठ करोड़ 55 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।


शर्तों की अवहेलना में भी पीेछे नहीं
—सड़क को क्रॉस कर केबल डालने की अनुमति नहीं होगी।
—60 फीट से अधिक के मुख्य मार्ग पर लगे पोल्स पर केबल लगाने की स्वीकृति नहीं होगी। इन मार्गों पर भूमिगत केबल बिछाने की स्वीकृति अलग से ली जाए।
—कार्य शुरू करने और खत्म करते समय जोन उपायुक्त कार्यालय में जानकारी देनी होगी।


संयुक्त सर्वे की तैयारी, कर दिया तबादला
निगम से राहत नहीं मिली तो कम्पनी ने स्वायत्त शासन विभाग का दरवाजा खटखटाया। आठ सदस्यीय कमेटी बनाने पर सहमति बनी। इसमें डीएलबी के तीन, निगम के तीन अधिकारियों के अलावा कम्पनी के दो प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। इधर, एक अक्टूबर को स्वायत्त शासन विभाग ने नवीन भारद्वाज को सवाईमाधोपुर नगर परिषद का आयुक्त बना दिया और मोनिका सोलंकी को अजमेर नगर निगम में भेज दिया।

Published on:
04 Oct 2021 10:08 am
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