
जयपुर जिले के चौमूं में गुरुवार को एक बुजुर्ग की आकस्मिक मौत होने के दो घंटे बाद ही मृतक के चचेरे भाई की मौत हो गई। बाद में दोनों भाइयों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। यह क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा। भाजपा महामंत्री महेश सेरावत ने बताया कि राजूवाली कोठी निवासी रामकुमार यादव (75) की दोपहर में हृदयगति रुकने से मौत हो गई थी।
इसकी खबर सुनकर करीब दो घंटे बाद उनके चचेरे भाई सुवालाल यादव (72) की भी आकस्मिक मौत हो गई। दोनों भाइयों के निधन की खबर से परिवार व क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों व स्वजनों ने दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया। महज दो घंटे के अंतराल में दो सगे भाइयों के निधन की खबर से परिवार ही नहीं, बल्कि आसपास के लोग भी स्तब्ध रह गए।
यह घटना चौमूं के वार्ड नंबर 44 स्थित राजू वाली कोठी क्षेत्र की है। यहां रहने वाले 72 वर्षीय सुवालाल करीब 10 दिनों से अस्वस्थ थे। उन्हें पैरालिसिस का अटैक आया था, जिसके बाद वे घर पर आराम कर रहे थे। गुरुवार दोपहर उनके चचेरे भाई 75 वर्षीय रामकुमार यादव उनका हालचाल जानने के लिए घर पहुंचे थे।
परिजनों के मुताबिक दोनों भाई घर पर बैठकर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान अचानक रामकुमार की तबीयत बिगड़ गई और उनके सीने में तेज दर्द हुआ। परिवार के सदस्य तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रामकुमार के निधन के बाद परिजन उनके अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए। शव को श्मशान घाट ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। चिता सज चुकी थी और मुखाग्नि देने की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी। इसी बीच घर पर मौजूद सुवालाल को अपने बड़े भाई के निधन की सूचना मिली।
भाई की मौत का समाचार सुनते ही सुवालाल गहरे सदमे में चले गए। परिवार के लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन वे अचानक अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े। परिजन तुरंत उन्हें संभालने पहुंचे, मगर तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। चिकित्सकीय जांच में उन्हें भी मृत घोषित कर दिया गया।
जब सुवालाल के निधन की सूचना श्मशान घाट पहुंची तो वहां मौजूद लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ। एक ही परिवार में कुछ घंटों के भीतर दो मौतों की खबर सुनकर हर कोई भावुक हो उठा। बाद में परिवार की सहमति से दोनों भाइयों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। इस मार्मिक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।