
Jaipur News: जयपुर के हाथीगांव में हुए गुलाबी हाथी फोटोशूट को लेकर उठे विवाद पर स्थानीय हैंडलर्स ने कड़ा जवाब दिया है। हाथीगांव विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने कहा कि यहां रहने वाले परिवार पीढ़ियों से हाथियों की देखभाल करते आ रहे हैं और उन्हें अपने बच्चों जैसा मानते हैं।
उनके अनुसार, फोटोशूट के दौरान किसी भी प्रकार की क्रूरता नहीं की गई और हाथी को केवल “ऑर्गेनिक रंगों” से रंगा गया था, जिससे उसे कोई नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि हाथियों के लिए पीने के पानी, नहाने और भोजन की पूरी व्यवस्था है।
इस मामले में रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने भी अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि फोटोशूट के दौरान हाथी पूरी तरह शांत, सहज और सहयोगी था। उनके मुताबिक, बिहाइंड-द-सीन फुटेज में भी हाथी सामान्य व्यवहार करता और लोगों के साथ खेलता नजर आता है। बुरुलेवा ने यह भी कहा कि उनके आर्ट प्रोजेक्ट का उद्देश्य जयपुर की सांस्कृतिक वास्तविकता को दिखाना था, न कि किसी भी जानवर को नुकसान पहुंचाना।
विवाद के केंद्र में रही हाथी ‘चंचल’ की मौत को लेकर भी हैंडलर्स ने स्पष्ट किया कि उसकी मृत्यु फोटोशूट के कई महीनों बाद हुई थी। उनके अनुसार, चंचल एक उम्रदराज हाथी थी और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। इस संबंध में पोस्टमार्टम भी कराया गया, जिसकी रिपोर्ट वन विभाग को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की संदिग्ध स्थिति सामने नहीं आई है।
यह विवाद अब एक बड़े मुद्दे की ओर इशारा करता है, जिसमें पर्यटन, परंपरा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन की बात सामने आती है। जयपुर में हाथियों का उपयोग लंबे समय से पर्यटन गतिविधियों में होता रहा है, लेकिन बदलते समय के साथ पशु कल्याण को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि परंपराओं को बनाए रखते हुए जानवरों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी जाए।
हैंडलर्स ने यह भी बताया कि सरकार की ओर से हाथियों के लिए 24 घंटे पशु चिकित्सक, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उनका कहना है कि वे लगातार हाथियों की देखभाल करते हैं और किसी भी तरह की लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता। कुल मिलाकर, जयपुर का यह मामला सिर्फ एक फोटोशूट विवाद नहीं बल्कि पशु अधिकार और पर्यटन के बीच संतुलन को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन चुका है।