जयपुर

Diwali Train: ट्रेनों में बाथरूम के पास भी जगह नहीं, दिवाली से 13 दिन पहले ही ठसाठस भरकर निकल रहीं गाड़ियां

Ground Report: दिवाली से 13 दिन पहले ही जयपुर से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बेकाबू होने लगी है। उत्तर पश्चिम रेलवे ने 100 से ज्यादा ट्रेनों में 150 से अधिक अतिरिक्त कोच लगाए हैं, लेकिन जनरल डिब्बों में जगह के लिए मारामारी शुरू हो गई है।
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Updated: 26 Oct 2026, 6:43 PM IST
Jaipur railway station
जयपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने के लिए मारा-मारी (फोटो-अनुग्रह सोलोमन)

जयपुर। दिवाली में अभी 13 दिन बाकी हैं, लेकिन ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ ने त्योहार के दौरान होने वाली परेशानी की तस्वीर पहले ही दिखानी शुरू कर दी है। जयपुर से चलने वाली और यहां से गुजरने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में एसी और स्लीपर श्रेणी में कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो रहा है। जिन यात्रियों को आरक्षित टिकट नहीं मिल पा रहे, उन्हें जनरल डिब्बों के भरोसे सफर करना पड़ रहा है। इन डिब्बों में हालात ऐसे हैं कि पैर रखने की जगह मिलना भी मुश्किल है। कई यात्री दरवाजों, गलियारों और शौचालय के आसपास खड़े होकर सफर करने को मजबूर हैं।

रेलवे की ओर से त्योहारों के दौरान भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त कोच लगाए जा रहे हैं, लेकिन यात्रियों की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही। सवाल यह है कि जब ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है, तो कम किराए में सफर करने वाले आम यात्रियों को राहत क्यों नहीं मिल पा रही?

प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्री, आपातकालीन खिड़की से ट्रेन में चढ़ता युवक (फोटो-अनुग्रह सोलोमन)

100 से ज्यादा ट्रेनों में 150 से अधिक अतिरिक्त कोच

उत्तर पश्चिम रेलवे के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 100 से ज्यादा ट्रेनों में 150 से अधिक अतिरिक्त कोच लगाए गए हैं। इनमें एसी, स्लीपर और जनरल श्रेणी के कोच शामिल हैं। रेलवे का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले यात्रीभार को संभालना और यात्रियों को राहत देना है। इसके बावजूद लंबी दूरी की कई एक्सप्रेस ट्रेनों में जनरल डिब्बों की सीमित उपलब्धता यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है।

समस्या केवल अतिरिक्त कोच लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि किस श्रेणी में कितने कोच बढ़ाए जा रहे हैं। जनरल डिब्बों में सफर करने वाले यात्रियों का दबाव देखते हुए इस श्रेणी में अधिक कोच जोड़ने की जरूरत महसूस की जा रही है। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में जनरल कोचों की संख्या बढ़ाने की मांग उठ रही है, ताकि कम किराए में यात्रा करने वालों को भीड़ के बीच जगह मिल सके।

जनरल डिब्बे के अंदर ठसाठस यात्री (फोटो- अनुग्रह सोलोमन)

एसी-स्लीपर फुल, जनरल के भरोसे यात्री

दिवाली और छठ पूजा पर बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की ओर रवाना होते हैं। जयपुर से विभिन्न शहरों के लिए चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में भी यात्रियों का दबाव बढ़ रहा है। एसी और स्लीपर श्रेणी में कंफर्म टिकट नहीं मिलने पर यात्रियों के सामने जनरल डिब्बे का विकल्प बचता है। लेकिन वहां पहले से मौजूद भीड़ के कारण सफर आसान नहीं है।

यात्रियों के लिए मुश्किल यह है कि त्योहार पर घर पहुंचना भी जरूरी है और महंगे टिकट का खर्च उठाना हर किसी के लिए संभव नहीं है। ऐसे में जनरल डिब्बे में जगह पाने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

ट्रेन में चढ़ने के लिए जद्दोजहद करते यात्री (फोटो-अनुग्रह सोलोमन)

दरवाजों से लेकर शौचालय तक भीड़

ट्रेनों के जनरल डिब्बों में भीड़ का दबाव इस कदर है कि यात्रियों को बैठने की जगह तो दूर, ठीक से खड़े होने की जगह भी नहीं मिल पा रही। कुछ यात्री शौचालय के पास और गलियारों में खड़े होकर सफर करते दिखे। दरवाजों के आसपास भी भीड़ रहने से चढ़ने और उतरने में परेशानी हो रही है। ऐसी स्थिति में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यात्रा करना विशेष रूप से मुश्किल हो गया है। भीड़ के बीच सामान संभालना और सही स्टेशन पर उतर पाना भी चुनौती है। वहीं, आरक्षित कोचों में बिना उचित टिकट जाने पर कार्रवाई या जुर्माने का डर यात्रियों को अलग परेशान करता है।

मजदूरों और विद्यार्थियों के लिए जनरल डिब्बा ही सहारा

जनरल कोच केवल कम किराए वाली यात्रा का विकल्प नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत हैं। मजदूर, विद्यार्थी, छोटे व्यापारी और कम आय वाले परिवार अक्सर इसी श्रेणी में सफर करते हैं। इनके लिए एसी या स्लीपर का टिकट लेना हर बार संभव नहीं होता। ऐसे में जनरल डिब्बों में पर्याप्त जगह नहीं मिलने का सीधा असर उनकी यात्रा पर पड़ता है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे को अतिरिक्त कोच लगाने के साथ यह भी देखना चाहिए कि किस श्रेणी में वास्तविक मांग कितनी है। यदि जनरल कोचों की संख्या जरूरत के मुताबिक नहीं बढ़ाई गई, तो त्योहारों के दौरान समस्या और बढ़ सकती है।

दिवाली-छठ पर बढ़ सकती है परेशानी

दिवाली के बाद छठ पूजा के लिए भी बड़ी संख्या में यात्रियों के आने-जाने का सिलसिला जारी रहेगा। ऐसे में रेलवे के सामने चुनौती केवल ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़ने की नहीं, बल्कि यात्रियों की जरूरत के हिसाब से उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी है। त्योहारों के दौरान भीड़ बढ़ने से पहले जनरल श्रेणी में पर्याप्त क्षमता उपलब्ध कराना जरूरी है।

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26 Oct 2026, 6:43 PM IST
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