
जयपुर। राजधानी जयपुर के परकोटा क्षेत्र में स्थित त्रिपोलिया बाजार की एक पुश्तैनी हवेली में कथित तौर पर करोड़ों रुपये का खजाना मिलने के मामले में अब नया खुलासा सामने आया है। इस बार पूरे घटनाक्रम का दावा उसी मजदूर ने किया है, जिसने हवेली तोड़ने का काम किया था। मजदूर का कहना है कि खुदाई के दौरान सोने-चांदी के सिक्के और अन्य कीमती सामान मिला था, लेकिन ठेकेदार ने उसे हिस्सेदारी देने का वादा पूरा नहीं किया।
जानकारी के अनुसार, विद्याधर का रास्ता स्थित जर्जर हवेली को नगर निगम के नोटिस के बाद हटाया जाना था। हवेली के मालिक राहुल सेठी और उनके परिवार ने निजी कंपनी के माध्यम से भवन को डिस्मेंटल कराने का अनुबंध किया था। जनवरी 2026 में तोड़ाई का काम शुरू हुआ था।
मजदूर का दावा है कि खुदाई के दौरान चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्के और पुराने चांदी के सिक्के मिले थे। ठेकेदार ने उसे कथित तौर पर 150 सोने-चांदी के सिक्के देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन बाद में यह कहते हुए मुकर गया कि अब खजाने की जानकारी हवेली मालिक तक पहुंच चुकी है।
इसी के बाद मजदूर सीधे हवेली मालिक राहुल सेठी के पास पहुंचा और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद सेठी ने 15 जुलाई को माणक चौक थाने में ठेकेदार और उसके सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। शिकायत में कहा गया है कि काम शुरू होने से पहले ठेकेदार और मजदूरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि यदि खुदाई के दौरान कोई भी बहुमूल्य वस्तु, पुरानी धरोहर या कीमती सामान मिले तो उसे तुरंत परिवार को सौंपा जाएगा। इसके बावजूद कथित रूप से ऐसा नहीं किया गया।
एफआईआर में ठेकेदार महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू सहित उसके सहयोगियों अनुज, जगदीश, रजनी, रेहान, सुल्तान और पप्पू अजमेरा के नाम शामिल हैं। आरोप है कि सभी ने मिलकर हवेली से मिले कीमती सामान को मालिकों से छिपाया और उसका आपस में बंटवारा कर लिया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि हवेली से करीब 40 से 45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14 से 15 कलश और 8 से 10 हजार पुराने चांदी के सिक्के मिले थे। फिलहाल माणक चौक थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि खजाना मिलने के दावे और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले से जुड़े सभी पक्षों से पूछताछ की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।