जयपुर

‘हम औरतें अपने आप की, नहीं किसी के बाप की’, जयपुर में पत्रिका गेट पर रात को महिलाओं के नारों ने खींचा सबका ध्यान

Jaipur Women Midnight Walk: जयपुर में पहली बार वुमन मिडनाइट वॉक आयोजित हुई। पत्रिका गेट से जवाहर सर्किल तक करीब 1000 महिलाएं और लड़कियां शामिल हुईं और महिलाओं की सुरक्षा, आजादी और सार्वजनिक जगहों पर बराबरी की आवाज उठाई।
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Oct 01, 2026
Jaipur midnight walk
पत्रिका गेट पर बुधवार रात को वुमन मिडनाइट वॉक के तहत जुटीं महिलाओं ने हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर महिला आजादी के नारे लगाए। पत्रिका गेट से शुरू होकर वॉक जवाहर सर्किल के चक्कर लगाकर खत्म हुई।

जयपुर. रात करीब साढ़े आठ बजे पत्रिका गेट पर महिलाओं और लड़कियों का जमावड़ा शुरू हुआ। हाथों में तख्तियां थीं और जुबां पर सवाल- 'रात किसकी? शहर किसका? आजादी किसकी ?' कुछ ही देर में सड़क नारों से गूंज उठी-'हम औरतें अपने आप की, ना किसी के बाप की', 'हमारी स्कर्ट नहीं है छोटी, पितृसत्ता की सोच है छोटी' और 'बेटी की लोकेशन नहीं, बेटे का इंटेंट चेक करो।' वॉक आगे बढ़ी तो नारे भी तेज होते गए- 'शर्म नहीं है मर्दो में, औरत क्यों है पर्दो में?' और 'नहीं डरेंगे डर के, मर्द को रखो घर में।'

महिलाओं को ही क्यों रोका जाए?

ठहाकों और चुटीले नारों के बीच सवाल गंभीर था- महिलाओं को रात में अपने ही शहर की सड़कों पर निकलने से रोका क्यों जाए? जयपुर में पहली बार द सिविक वॉयस और जयपुर कॉमन मूवमेंट की ओर से वुमन मिडनाइट वॉक आयोजित की गई। पत्रिका गेट से शुरू हुई वॉक जवाहर सर्किल का चक्कर लगाकर खत्म हुई। इसमें 900 से एक हजार महिलाएं और लड़कियां शामिल हुईं। कुछ पुरुषों ने भी महिलाओं की सुरक्षा और आजादी के समर्थन में हिस्सा लिया। आयोजक मुकुल मिश्रा ने कहा कि महिलाएं कब तक रात में अपने ही शहर में कैद रहेंगी? सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की मौजूदगी सामान्य होनी चाहिए। वॉक के दौरान कहीं गीत गूंजे तो कहीं कविता सुनाई गई। महिलाओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। हंसी-ठिठोली के बीच सुरक्षा, बराबरी और सार्वजनिक जगहों पर स्वतंत्र आवाजाही का मुद्दा प्रमुख रहा। महिलाएं अपनी मां, बहन, पिता, भाई और दोस्तों के साथ शामिल हुईं।

पत्रिका गेट पर प्रदर्शन के दौरान की फोटो

क्या है वुमन मिडनाइट वॉक?

वुमन मिडनाइट वॉक की शुरुआत 2016 में दिल्ली में मल्लिका तनेजा ने की थी। निर्भया आंदोलन के बाद शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की रात में सार्वजनिक जगहों पर मौजूदगी और स्वतंत्र आवाजाही को लेकर जागरूकता पैदा करना रहा है। पहल का संदेश है कि महिलाओं को रात से डराने के बजाय सार्वजनिक स्थानों को उनके लिए सुरक्षित बनाया जाए।

जवाहर सर्किल पर महिलाओं की वुमन नाइट वॉक

'बेटी को डर के साथ नहीं, आजादी के साथ जीना चाहिए'

200 फीट बायपास से 13 साल की बेटी परी के साथ पहुंचीं अनुजा ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनकी बेटी सुरक्षित महसूस करे और डर के बजाय आजादी के साथ जीवन जिए। परी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की खबरें देखकर कई बार बाहर निकलने में डर लगता है। सांगानेर से आलमीन अपनी 9 साल की बहन अफिसा के साथ पहुंचीं। उन्होंने कहा कि रात में सुरक्षित होकर बाहर निकलना सिर्फ पुरुषों का अधिकार नहीं होना चाहिए।

13 साल की बच्ची अपनी मां के साथ प्रदर्शन में हुई शामिल

'महिलाओं पर रूल्स नहीं, पुरुषों को एजुकेशन चाहिए'

वॉक में शामिल पहल वर्मा और अनुराधा तिवारी ने कहा कि समाज में बदलाव के लिए बच्चों को शुरू से बराबरी और सम्मान की शिक्षा देनी होगी। महिलाओं ने कहा कि सुरक्षा के नाम पर लड़कियों के कपड़ों और बाहर निकलने के समय पर पाबंदी लगाने के बजाय लड़कों और पुरुषों को सम्मान, सहमति और बराबरी की समझ देना जरूरी है। वैशाली नगर से आए संजय ने कहा कि महिलाओं की आजादी और सुरक्षा का मुद्दा केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। समाज की सोच में बदलाव के लिए पुरुषों की भागीदारी भी जरूरी है।

Updated on:
01 Oct 2026 11:00 am
Published on:
01 Oct 2026 11:00 am