
Mental Health Awareness: जयपुर। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां हमेशा चेहरे पर नजर नहीं आतीं। कई बार व्यक्ति सामान्य दिखाई देता है, लेकिन भीतर ही भीतर तनाव, अवसाद और भावनात्मक समस्याओं से जूझ रहा होता है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को समझना, समय पर परामर्श लेना और समाज में इससे जुड़े पूर्वाग्रहों को दूर करना बेहद जरूरी है। इसी संदेश के साथ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जयपुर में विशेष जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के तत्वावधान में 10 अक्टूबर को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर महानगर द्वितीय, एसएमएस अस्पताल और एसएमएस मेडिकल कॉलेज की ओर से मेडिकल कॉलेज परिसर के लेक्चर थिएटर-1 में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यशाला में मानसिक स्वास्थ्य, समय पर उपचार, मेडिटेशन और महिलाओं पर पड़ने वाले मानसिक दबाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि विशिष्ट न्यायाधीश, पोक्सो एक्ट प्रकरण संख्या-1, जयपुर महानगर द्वितीय विकास खंडेलवाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को केवल ऐसी बीमारियों तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए, जिन्हें बाहर से पहचाना जा सके। किसी आघात या दुर्घटना के बाद उत्पन्न मानसिक समस्याओं को दवा, काउंसलिंग और अन्य जरूरी उपायों से नियंत्रित करने के प्रयास किए जा सकते हैं।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल में मेडिटेशन की उपयोगिता पर भी जोर दिया। इसी क्रम में कार्यक्रम के दौरान हार्टफुलनेस मेडिटेशन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें ध्यान के माध्यम से मानसिक शांति और संतुलन के महत्व को रेखांकित किया गया।
कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि और मनोस्वास्थ्य संस्थान, जयपुर के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. शिव गौतम ने मानसिक बीमारियों की बुनियादी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर समाज में आज भी कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं। इनके कारण लोग अपनी परेशानी स्वीकार करने, विशेषज्ञों से सलाह लेने और उपचार शुरू करने में देर कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और शुरुआती स्तर पर समस्या को पहचानना महत्वपूर्ण है। डॉ. गौतम ने भगवान श्रीकृष्ण के अर्जुन को दिए गए मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए मानसिक उलझनों के समय परामर्श की आवश्यकता को समझाया। उनका संदेश था कि मानसिक परेशानियों के लिए मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि समस्या को समझने की दिशा में जरूरी कदम है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर महानगर द्वितीय की सचिव पल्लवी शर्मा ने महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि उम्र के साथ होने वाले विभिन्न शारीरिक और भावनात्मक बदलावों के कारण महिलाओं को कई बार मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। समय पर सहयोग और जागरूकता के अभाव में यह तनाव अवसाद जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारियों को किसी एक नजरिये से देखने के बजाय उनके अलग-अलग पहलुओं को समझना जरूरी है। विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी पूर्वाग्रहों को दूर करना और आमजन तक जागरूकता पहुंचाना है। उन्होंने ‘न्याय आपके द्वार’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि विधिक सेवा संस्थाएं समाज तक सहायता और जागरूकता पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।