जयपुर

JLF 2026: ‘ड्राइवर के कहने पर रोजाबल गया, दो वर्ष तक रिसर्च कर लिखी बुक’

जब मैं किसी प्रोजेक्ट पर काम करता हूं, तो उस समय जो भी पढ़ाई होती है, वह उसी काम से जुड़ी हुई होती है। ‘द रोजाबल लाइन’ लिखने से पहले मुझे लगभग 40 किताबें पढ़नी पड़ी थीं। यह कहना है अश्विन सांघी का। वे गुरुवार को शुनाली खुल्लर श्रॉफ के साथ जेएलएफ के सेशन में चर्चा कर रहे थे।

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Jan 15, 2026
Jaipur Literature Festival: फोटो पत्रिका

जयपुर। जब मैं किसी प्रोजेक्ट पर काम करता हूं, तो उस समय जो भी पढ़ाई होती है, वह उसी काम से जुड़ी हुई होती है। ‘द रोजाबल लाइन’ लिखने से पहले मुझे लगभग 40 किताबें पढ़नी पड़ी थीं। इसी तरह ‘द साइरोप्ट सागा’ या ‘कीपर्स ऑफ द कालचक्र’ के लिए क्वांटम थ्योरी पर किताबें पढ़नी पड़ीं, जो एक नॉन साइंस स्टूडेंट के लिए आसान नहीं थीं। यह कहना है अश्विन सांघी का। वे गुरुवार को शुनाली खुल्लर श्रॉफ के साथ जेएलएफ के सेशन में चर्चा कर रहे थे। सांघी ने कहा कि ‘दी भारत सीरीज: दी अयोध्या एलायंस’ एक थ्रिलर उपन्यास है, जो इतिहास, पौराणिक कथाओं और अत्याधुनिक विज्ञान को जोड़ता है। यह एक प्राचीन रहस्य के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अयोध्या, कैलाश आदि से जुड़ी है।

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मैं कल्पना के संसार में लिखता हूं

अश्विनी ने कहा कि मुझे दो परिभाषाएं बहुत पसंद हैं। एक सी.एस. लुईस की, जो मिथक की बात करते हुए कहते हैं कि मिथक एक ऐसा झूठ होता है, जो किसी सच्चाई को उजागर करता है। दूसरी परिभाषा जॉर्ज संतायाना की है, जो इतिहास के बारे में कहते हैं कि इतिहास उन घटनाओं के बारे में लिखे गए झूठों का पुलिंदा है, जो कभी हुई ही नहीं और जिन्हें उन लोगों ने लिखा जो वहां मौजूद भी नहीं थे। मेरे लिए अच्छी बात यह है कि मैं कल्पना के संसार में लिखता हूं।

कश्मीर शादी में गया, तो फ्लाइट हो गई थी रद्द

उन्होंने कहा कि कई वर्षों पहले मैं कश्मीर किसी शादी में गया था। अगले दिन मेरी फ्लाइट रद्द हो गई। जब फ्लाइट रद्द हुई, तो मैं ड्राइवर के साथ बाहर निकल गया। इससे पहले 10-15 बार कश्मीर जा चुका था, इसलिए ड्राइवर ने जो भी जगहें सुझाईं, उन्हें मैंने मना कर दिया, क्योंकि वहां मैं पहले जा चुका था। तभी उसने पूछा, क्या आप रोजाबल जाना चाहेंगे, तक मैं वहां गया। उस समय वहां लगभग 15 फुट के आकार का मकबरा था। इसके बाद मैंने इस स्थान पर दो वर्षों तक शोध किया और एक पुस्तक लिखी।

किसी बात को शांति से सुन लेना ही काफी होता है

उन्होंने कहा कि हमें इस बात को स्वीकारना चाहिए कि दुनिया को शून्य की अवधारणा हमने दी है। आज माहौल इतना ध्रुवीकृत हो गया है कि अगर कोई चीज भारत से आई है, तो उसे बिना सवाल किए महान मान लिया जाता है और अगर भारत से नहीं आई, तो उसे निरर्थक घोषित कर दिया जाता है। कभी-कभी किसी व्यक्ति की बात को शांति से सुन लेना ही काफी होता है, क्योंकि उनमें से कुछ बातें वास्तव में सच होती हैं।

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