जयपुर

JLF 2026: पूर्व संयुक्त राष्ट्र अधिकारी लक्ष्मी पुरी ने कहा- यूएन के बगैर खतरे में पढ़ सकती है मानवता

Jaipur Literature Festival 2026: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में काम करने की चुनौतियां पहले की तुलना में बदल गई है। वर्तमान में यूएन की स्थिति निराशाजनक हो गई है। यह कहना है पूर्व संयुक्त राष्ट्र अधिकारी लक्ष्मी पुरी का।

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Jan 18, 2026
पूर्व संयुक्त राष्ट्र अधिकारी लक्ष्मी पुरी। फोटो: पत्रिका

जयपुर। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में काम करने की चुनौतियां पहले की तुलना में बदल गई है। वर्तमान में यूएन की स्थिति निराशाजनक हो गई है। इसकी फंडिंग में भी कटौती हो गई है। कई ऐसे देश हैं, जिनको यूएन को सपोर्ट करना चाहिए वे सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। भारत यूएन को सपोर्ट करता है। सभी देशों को मिलकर यूएन को इस संकट से बाहर निकालना चाहिए। यूएन के बगैर मानवता खतरे में पढ़ सकती है। यह कहना है पूर्व संयुक्त राष्ट्र अधिकारी लक्ष्मी पुरी का। वह शनिवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होने के लिए आई।

पत्रिका से खास बातचीत में अपनी बुक ‘द साड़ी इटर्नल’ पर बात करते हुए लक्ष्मी पुरी ने कहा कि इसमें साड़ी के प्रकार समेत साड़ी से जुड़े कई विषयों को समाहित किया गया है। मेरे लिए साड़ी केवल एक वस्त्र नहीं है, बल्कि आशा और आकांक्षा का प्रतीक है। बॉलीवुड इंडस्ट्री ने भी साड़ी का प्रचार-प्रसार करने में योगदान दिया है।

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राजस्थान की संस्कृति से बहुत प्रभावित

उन्होंने कहा कि राजस्थान मुझे बहुत पसंद है। जब 18 वर्ष की थी, तब पहली बार यहां आई थी। भारतीय विदेश सेवा में रही, तो अधिकांश समय बाहर रहती थी। लेकिन जब भी भारत आती थी, तो राजस्थान जरूर आती थी। बेटियों को भी यहां लाती रहती हूं, वे भी राजस्थान की संस्कृति से बहुत प्रभावित होती हैं। यहां की संस्कृति, विरासत, शिल्पकला, आभूषण, कुंदन का काम, साडिय़ां मुझे बेहद पसंद है।

…तो हमें मॉर्डन नहीं समझा जाता

जेन जी की सोच को लेकर पुरी ने कहा कि कई जेन जी युवतियों/ महिलाओं का कहना है कि यदि हम साड़ी पहनते हैं तो हमें पिछड़ा माना जाता है या मॉर्डन नहीं समझा जाता है। इससे असुविधा भी होती है। लेकिन कईयों को तो साड़ी पहनना भी नहीं आता है।

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