Rajasthan Sanskrit University: विभाग ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामसेवक दुबे की विदेश यात्रा पर सवाल उठाए हैं।
जयपुर। वित्त विभाग की ओर से जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय की विशेष ऑडिट में कई आपत्तियां उठाई गई हैं, जो तर्कसंगत नहीं मानी जा सकतीं। विभाग ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामसेवक दुबे की विदेश यात्रा पर सवाल उठाए हैं।
विभाग ने यह आपत्ति जताई कि कुलपति ने विदेश यात्रा की अनुमति सरकार से क्यों नहीं ली, जबकि विश्वविद्यालय राजभवन के अधीन आता है और कुलपतियों को कुलाधिपति से अनुमति लेनी होती है। कुलपति प्रो. दुबे ने इस पर स्पष्ट किया कि उन्होंने कुलाधिपति और राज्यपाल से विदेश यात्रा की अनुमति प्राप्त की थी।
दरअसल, कुलपति संस्कृत भाषा पर एक व्याख्यान देने नेपाल गए थे, जिस पर वित्त विभाग ने आपत्ति जताई। इतना ही नहीं, विभाग ने विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव के आवास आवंटन के मामले में भी आपत्ति जताई। वित्त विभाग का तर्क था कि सहायक कुलसचिव ने आवास आवंटन के आदेश जारी होने के बावजूद निजी आवास में रहना जारी रखा। जबकि असल में विश्वविद्यालय ने सहायक कुलसचिव को आवास आवंटन का कोई आदेश जारी ही नहीं किया था। वित्त विभाग ने इन आपत्तियों का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय की ग्रांट रोक दी।
वित्त विभाग ने एक और आपत्ति उठाई है कि विश्वविद्यालय के एक शिक्षक की वेतनवृद्धि नियमों के विपरीत की गई है और कोर्ट ने वेतनवृद्धि को रोकने का आदेश दिया है। विश्वविद्यालय ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए बताया कि किसी भी वेतनवृद्धि मामले में कोर्ट का कोई आदेश नहीं है, फिर भी वित्त विभाग ने शिक्षक से वसूली निकाल ली।
वित्त विभाग ने विश्वविद्यालय की ऑडिट में कई आपत्तियां उठाकर ग्रांट रोक दी, लेकिन तत्कालीन वित्त नियंत्रक दुर्गेश राजोरिया के खिलाफ कुलपति की शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। राजोरिया पर परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने सहित कई आरोप हैं। राजभवन की एक कमेटी ने भी जांच कर उन्हें दोषी पाया और वित्त विभाग को कार्रवाई करने के लिए लिखा।
वित्त विभाग ने ऑडिट में कई आपत्तियां लगाई हैं, जो सही नहीं हैं। ग्रांट रुकने से सभी कार्य प्रभावित होंगे।
-प्रो. रामसेवक दुबे, कुलपति, जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय