
जयपुर। संस्कृत भाषा और उसमें लिखे ग्रंथों के संरक्षण के लिए स्थापित किए गए जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय को बढावा देने के बजाय सरकार उस पर वित्तीय संकट खड़ा कर रही है। 27 जनवरी को वित्त (व्यय) विभाग के शासन सचिव नवीन जैन ने वित्तीय अनियमितता बताकर संस्कृत विश्वविद्यालय के आगामी बजट को रोक दिया है।
इससे विवि पर आर्थिक और प्रशासनिक संकट के हालात बन रहे हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामसेवक दुबे ने राजभवन सचिवालय को पत्र लिखकर मामले से अवगत करवा दिया है। गौरतलब है कि कुलपति ने विवि की परीक्षा में हुई धांधली, वाहन औैर टेंडर में हुए वित्तीय भ्रष्टाचार को लेकर तत्कालीन वित्त नियंत्रक दुर्गेश राजोरिया के विरुद्ध राजभवन और सरकार को शिकायत की थी।
निजी महाविद्यालयों ने पीजीडीसीए और पीजीडीवाईटी के लिए आवंटित सीटों से अधिक परीक्षार्थियों को परीक्षा दिलवाकर फर्जीवाड़ा किया था। कुलपति की शिकायत पर राज्यपाल ने 12 अगस्त को तीन पूर्व कुलपतियों की जांच समिति का गठन किया था। समिति ने विश्वविद्यालय में पदस्थापित वित्त नियंत्रक व तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक दुर्गेश राजोरिया को इस प्रकरण में दोषी माना।
राजभवन ने राजोरिया के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के निर्देश संस्कृत शिक्षा विभाग को दिए। विभाग ने प्रकरण को कार्यवाही के लिए वित्त विभाग को भेजा था। इसी बीच राजोरिया ने भी विवि के वित्तीय प्रकरणों पर सरकार से जांच की मांग की। वित्त विभाग ने कुलपति और वित्त नियंत्रक की एक दूसरे पर की गई शिकायतों पर विशेष जांच कराई। वित्त विभाग ने जांच रिपार्ट में कथित अनियमितता को गंभीर मानते हुए वसूली नहीं होने तक विवि के आगामी बजट पर रोक लगा दी। लेकिन वित्त नियंत्रक व राज्य लेखा सेवा के अधिकारी दुर्गेश राजोरिया पर कार्यवाही करने के राजभवन के आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
सनातन धर्म की मूल भाषा संस्कृत के शिक्षण से जुडे़ विवि की ग्रांट रुकने से पुरातन शास्त्रों के अध्ययन पर बुरा असर पड़ रहा है। ग्रांट रुकने से एक ओर जहां शिक्षकों और अशैक्षणिक कर्मचारियों का वेतन रुक जाएगा, वहीं विवि की परीक्षा, अनुसंधान, कार्यशाला, व्याख्यान सहित विकास से जुड़े कार्यों पर बुरा असर पड़ेगा। प्रदेशभर के लगभग 200 से अधिक सरकारी और निजी कॉलेज इससे संबंधित हैं। ऐसे में ग्रांट रुकने से हजारों छात्र प्रभावित होंगे।
फरवरी 2001 से चल रहे विवि की ग्रांट पहली बार भाजपा सरकार में रोकी गई है। शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. माता प्रसाद शर्मा ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रहे हैं, वहीं राजस्थान में भाजपा सरकार ने संस्कृत विवि के बजट पर रोक लगा दी। उन्होंने मुख्यमंत्री और संस्कृत शिक्षा मंत्री को पत्र ल्खिकर तुरंत ग्रांट जारी करने का आग्रह किया है। वहीं, छात्रों ने सरकार के इस आदेश का विरोध कर दिया है। एबीवीपी छात्रनेता अविनाश गौतम ने कहा है कि सरकार ने आदेश को वापस नहीं लिया तो आंदोलन किया जाएगा।
संस्कृत विवि की ग्रांट रोकने का मामला विधानसभा तक पहुंच गया है। मामले पर भाजपा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण और निर्दलीय विधायक यूनुस खान ने प्रश्न लगाया है। वहीं, वरिष्ठ भाजपा विधायक कालीचरण सराफ भी संस्कृत विवि की परीक्षाओं में हुई धांधली के मामले को उठाकर दोषियों पर कार्रवाई की लगातार मांग कर रहे हैं। दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने जुर्माना वसूलकर प्रकरण को निस्तारित करने के आदेश दे दिए और अब सरकार ने ही संस्कृत यूनिवर्सिटी की ग्रांट रोक दी।
विश्वविद्यालय की विशेष जांच में उजागर वित्तीय अनियतिताओं की वसूली के लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। वसूली होते ही ग्रांट जारी हो जाएगी।
-मदन दिलावर, संस्कृत शिक्षा मंत्री
Published on:
26 Feb 2025 07:44 am
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