
जयपुर/नई दिल्ली। एससी-एसटी एक्ट के विरोध में मप्र के उज्जैन में करणी सेना के प्रदर्शन के बाद भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब राजस्थान में भी सजग हो गया है। इस तरह का प्रदर्शन अन्य जगहों पर न हो इसके लिए पार्टी सवर्ण नेताओं से मंथन कर कुछ नेताओं को महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने करणी सेना और अन्य सवर्ण संगठनों की नाराजगी को लेकर भाजपा को निर्देश दिया है कि नाराजगी को दूर करने के लिए बीच का रास्ता निकाला जाए। संघ से जुड़े एक नेता के मुताबिक सवर्ण अगर नाराज हुए तो भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में सवर्णों की नाराजगी का जोखिम नहीं लेना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश और राजस्थान में करणी सेना मजबूत संगठन के तौर पर काम कर रहा है। इन दोनों ही राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। पार्टी किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती।
दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार है। मध्य प्रदेश में भाजपा चौथी बार लगातार सरकार बनाने की तैयारी हो रही है, वहीं राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर को रोकना भी पार्टी की रणनीति में शामिल है।
नेताओं को जिम्मेदारी
सवर्णों को मनाने के लिए कई महत्त्वपूर्ण नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि नाराज लोगों को मनाया जा सके। इसमें राज्य स्तर पर कुछ नेताओं का जहां कद बढ़ाया जाएगा वहीं केंद्रीय नेताओं को दायित्व देकर समाधान के लिए कहा जाएगा।
उज्जैन से शुरुआत
करणी सेना ने रविवार को उज्जैन में बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में जहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। करणी सेना ने कहा कि अभी तो यह शुरुआत है आगे इस तरह के और बड़े प्रदर्शन होंगे। लोगों की नाराजगी भाजपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस नेताओं के प्रति भी है। प्रदर्शनकारियों ने मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पोस्टर फाड़े हैं।