Kotputli-Kishangarh Greenfield Expressway : प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया।ॉ
Kotputli-Kishangarh Greenfield Expressway : कोटपूतली। प्रस्तावित कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। किसान महापंचायत के नेतृत्व में क्षेत्रभर से जुटे किसानों ने 100 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ गोनेड़ा गांव से जिला कलक्ट्रेट तक मार्च निकाला और मुख्यमंत्री के नाम कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर परियोजना निरस्त करने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था संभाली गई, वहीं अतिरिक्त जिला कलक्टर ओमप्रकाश सहारण सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि किसान अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया वापस नहीं ली तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
सुबह करीब 11:30 बजे गोनेड़ा गांव से किसानों का काफिला रवाना हुआ। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सवार किसान नारे लगाते हुए नेशनल हाईवे-48 से होकर जिला कलक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट नजर आया। शहर में यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को कृषि उपज मंडी परिसर में रोक दिया गया। इसके बाद किसान पैदल कलक्ट्रेट पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया।
किसानों का कहना है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना के तहत उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की पीढ़ियों से जुड़ी जमीन छीन रही है, जबकि वैकल्पिक मार्गों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा।
किसानों ने जिला कलक्टर को सौंपे ज्ञापन में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को निरस्त करने, कृषि भूमि अधिग्रहण पर तत्काल रोक लगाने और किसानों से सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण नहीं करने की मांग की। साथ ही परियोजना के वैकल्पिक मार्गों पर पुनर्विचार तथा प्रभावित किसानों के लिए स्पष्ट मुआवजा नीति घोषित करने की मांग भी उठाई गई।