
Nikita Singh Murder Case: जयपुर। जयपुर महानगर-द्वितीय की अपर सेशन न्यायालय (क्रम-04) ने अपनी 22 वर्षीय बेटी निकिता सिंह की हत्या करने के मामले में दोषी मां सीता देवी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश नीलम करवा ने दोषी पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने कहा कि वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य कभी झूठ नहीं बोलते, भले ही गवाह अपने बयान से मुकर जाएं।
मामला 20 मई 2024 का है। जयपुर में बिन्दायका थाना क्षेत्र के मुण्डियारामसर स्थित घर में निकिता सिंह मृत मिली थी। घटना के समय घर में केवल मां और बेटी मौजूद थी। जांच में सामने आया कि मोबाइल पर एक युवक से बातचीत को लेकर मां-बेटी के बीच अक्सर विवाद होता था और घटना वाले दिन भी इसी बात पर झगड़ा हुआ।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने निकिता द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने का दावा किया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर फंदे का कोई निशान नहीं मिला। मेडिकल साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि निकिता की मौत मुंह और नाक दबाने से दम घुटने के कारण हुई थी। अदालत ने जांच अधिकारी की खामियों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि त्रुटिपूर्ण अनुसंधान से वैज्ञानिक साक्ष्यों का महत्व कम नहीं होता। कोर्ट ने इसे हत्या मानते हुए दोषी मां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
ये पूरा मामला बिन्दायका थाना क्षेत्र के मुण्डियारामसर स्थित घर में 20 मई 2024 को घटित हुआ था। प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाली 22 वर्षीय निकिता सिंह दोपहर में अपना मोबाइल ढूंढ़ रही थी, क्योंकि निकिता की मां सीता देवी ने उसका मोबाइल छिपा दिया था। इसी बात को लेकर मां-बेटी के बीच झगड़ा हो गया था। आवेश में आकर मां ने ही अपनी बेटी की हत्या कर दी थी। इसके बाद पति ब्रजेश सिंह को सूचना दी।
पति के पहुंचने के बाद एंबुलेंस की मदद से बेटी को सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाया गया था। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया, जिसमें अहम जानकारी सामने आई। मां सीता देवी एक ही बात कह रही थी कि बेटी ने खुदकुशी की है। लेकिन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने असली राज उगल दिया था।