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Rajasthan News : कोटा ACB की जयपुर में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! ट्रैप में धरे गए ‘घूसखोर’ रजिस्ट्रार और ‘दलाल’ कर्मचारी   

Jaipur नगर निगम में गरीब जोड़ों के विवाह पंजीयन पर वसूली। कोटा ACB ने मैरिज रजिस्ट्रार विक्रम सिंह और कर्मचारी को 12500 घूस लेते दबोचा।
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Jaipur Marriage Registrar Arrested Kota ACB Trap 12500 Bribe Case Updates

एसीबी के हत्थे चढ़ा मैरिज रजिस्ट्रार विक्रम सिंह और कर्मचारी राकेश चौधरी

राजधानी जयपुर के लालकोठी स्थित नगर निगम मुख्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब कोटा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक बेहद संवेदनशील मामले में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। जयपुर के प्रताप नगर स्थित आर्य समाज मंदिर में होने वाली गरीब और दहेजरहित शादियों के मैरिज सर्टिफिकेट (विवाह पंजीयन) जारी करने के नाम पर मोटी रकम वसूलने वाले मैरिज रजिस्ट्रार विक्रम सिंह और उनके अधीनस्थ कर्मचारी राकेश चौधरी को एसीबी ने 12 हजार 500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोच लिया। समाज सेवा के पवित्र कार्य में रुकावट डालकर जबरन घूस मांगने वाले इन सरकारी कारिंदों पर कोटा एसीबी की टीम ने जयपुर आकर यह जाल बिछाया, जिसने जयपुर नगर निगम के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के एक बड़े नेटवर्क को उजागर कर दिया है।

फीस 110 रु, लेकिन मांग रहे थे 3,000

एसीबी के महानिदेशक (DG) गोविन्द गुप्ता ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोटा विजय स्वर्णकार को एक पीड़ित परिवादी ने उपस्थित होकर शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी जयपुर के प्रताप नगर स्थित आर्य समाज मंदिर में प्रधान के पद पर कार्यरत हैं। वे संस्था के माध्यम से गरीब, अनाथ और दहेजरहित जोड़ों का विवाह संपन्न करवाते हैं।

नियमानुसार इन शादियों का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित शासकीय शुल्क मात्र 110 रुपये प्रति विवाह तय है। इसके बावजूद मैरिज रजिस्ट्रार विक्रम सिंह और कर्मचारी राकेश चौधरी द्वारा प्रति विवाह पंजीयन फाइल 2,500 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक की अवैध रिश्वत राशि की मांग की जा रही थी।

जबरन कमियां निकालकर करते थे परेशान

शिकायत में यह भी सामने आया कि जब परिवादी या गरीब जोड़ों के परिजन रिश्वत देने से मना करते थे, तो मैरिज रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा मैरिज सर्टिफिकेट जारी करने के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में जानबूझकर अनावश्यक तकनीकी कमियां निकाल दी जाती थीं। फाइलों को अटकाकर परिवादियों को हफ्तों तक नगर निगम कार्यालय के चक्कर कटवाए जाते थे और मानसिक रूप से परेशान किया जाता था ताकि वे तंग आकर घूस देने के लिए मजबूर हो जाएं।

पहले प्लानिंग, फिर ट्रेप को अंजाम

परिवादी की शिकायत को अत्यंत गंभीर मानते हुए एसीबी के उपमहानिरीक्षक पुलिस (DIG) ओम प्रकाश मीणा के निर्देशन में शिकायत का बेहद गोपनीय तरीके से सत्यापन (Verification) कराया गया। मांग सत्यापन के दौरान यह साफ हो गया कि आरोपी मैरिज रजिस्ट्रार विक्रम सिंह अपने कर्मचारी राकेश चौधरी के माध्यम से रिश्वत की राशि कलेक्ट करवाता है। इसके बाद 2 July 2026 को एसीबी कोटा रेंज के पुलिस उप अधीक्षक (Dy SP) अनीस अहमद के नेतृत्व में एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से नगर निगम लालकोठी स्थित कार्यालय में दबिश देकर दोनों आरोपियों को परिवादी से 12,500 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

जेब से अतिरिक्त नकदी बरामद

ट्रैप की कार्रवाई के दौरान जब एसीबी टीम ने आरोपी कर्मचारी राकेश चौधरी की व्यक्तिगत तलाशी ली, तो उसके पास से विभिन्न नोटों की गड्डियों के रूप में 38,000 रुपये की अतिरिक्त नकद राशि बरामद हुई। इस भारी कैश के संबंध में आरोपी कर्मचारी मौके पर कोई संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका।

एसीबी को अंदेशा है कि यह राशि भी अन्य पर्यटकों या आवेदकों से मैरिज सर्टिफिकेट के एवज में वसूली गई रिश्वत का हिस्सा हो सकती है, जिसके संबंध में गहन जांच की जा रही है।

घरों पर छापेमारी और मामला दर्ज

कार्रवाई के तुरंत बाद एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (ADG) स्मिता श्रीवास्तव एवं महानिरीक्षक पुलिस (IG) एस. परिमला के निर्देशन में दोनों आरोपियों के जयपुर और अन्य शहरों में स्थित निजी आवासों तथा संभावित ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।

एसीबी द्वारा दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाएं आवाज

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी सरकारी विभाग में अपने जायज काम के लिए घूस न दें। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है, तो तुरंत एसीबी के 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 या व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9413502834 पर संपर्क करें।