
Fraud in Disability Quota in Rajasthan: जयपुर: प्रदेश में दिव्यांग आरक्षण कोटे के दुरुपयोग का एक बड़ा और संगठित मामला सामने आया है, जिसमें सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े के जरिए प्रवेश पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) को प्राप्त करीब 170 परिवादों में से अब तक 27 की जांच पूरी हो चुकी है। इन जांचों में 44 अभ्यर्थियों को दोषी पाया गया है, जिन्होंने कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया। हालांकि, स्टॉफ की कमी के कारण शेष 143 परिवाद संबंधित थानों को जांच के लिए भेज दिए गए हैं, जहां वे अभी लंबित हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में शामिल कुछ अभ्यर्थियों ने डॉक्टरों और दलालों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए। इस घोटाले में दस अलग-अलग भर्तियां शामिल हैं, जिससे इसका दायरा काफी व्यापक माना जा रहा है।
अब एसओजी जांच का विस्तार करते हुए उन डॉक्टरों और बिचौलियों को भी आरोपित करने की तैयारी में है, जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने में भूमिका निभाई। एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भवानी शंकर मीणा की 27 परिवादों की जांच रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज कर मामलों का अनुसंधान निरीक्षक यशवंत सिंह को सौंपा गया है।
एसओजी की ओर से सवाई मानसिंह अस्पताल के मेडिकल बोर्ड में कराए पुनः परीक्षण में अधिकांश आरोपियों की दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम पाई गई। कुछ अभ्यर्थी तो जांच से बचने के लिए मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित ही नहीं हुए।
रीट भर्ती-2022 (लेवल-1 व 2), वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 व 2023, स्कूल व्याख्याता भर्ती-2015-16, कनिष्ठ लिपिक/सहायक भर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती-2022 व 2023, एएनएम सीधी भर्ती-2023, कृषि पर्यवेक्षक, पशु चिकित्सक, सहायक आचार्य और ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा शामिल हैं।