Rajasthan Solar Corridor: राजस्थान में 8 हजार करोड़ रुपए की लागत से 5,760 मेगावाट सोलर बिजली को ट्रांसमिशन कॉरिडोर जोड़ने की मंजूरी मिलते ही बिजली महकमे में नया विवाद खड़ा हो गया है।
Rajasthan Solar Corridor: राजस्थान में 8 हजार करोड़ रुपए की लागत से 5,760 मेगावाट सोलर बिजली को ट्रांसमिशन कॉरिडोर जोड़ने की मंजूरी मिलते ही बिजली महकमे में नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर सरकार इसे रिन्यूएबल एनर्जी के बड़े कदम के तौर पर पेश कर रही है, वहीं पूर्व ऊर्जा एसीएस अजिताभ शर्मा ने सवाल उठाया है कि दूसरे राज्यों को बिजली भेजने वाले नेटवर्क का बोझ आखिर राजस्थान के उपभोक्ता क्यों उठाएं?
इस प्रस्तावित मेगा प्रोजेक्ट को गुरुवार को बिजली कंपनियों की कोऑर्डिनेशन कमेटी ने सहमति दे दी है। बीकानेर से अलवर तक ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनेगा। इस प्रस्ताव आने से पहले आइएएस अजिताभ शर्मा (पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा, अब राजस्व मंडल में) की सोशल मीडिया पोस्ट ऊर्जा विभाग, इंजीनियरिंग हलकों और ब्यूरोक्रेसी में चर्चा में है।
पूर्व ऊर्जा एसीएस अजिताभ शर्मा ने लिखा था कि क्या किसी भी राज्य के भीतर बनने वाले महंगे ट्रांसमिशन नेटवर्क का उपयोग दूसरे राज्यों को बिजली भेजने में होता है, तो इसकी लागत आखिर उपभोक्ता क्यों उठाए? किसी भी नई ट्रांसमिशन परियोजना को मंजूरी देने से पहले उसकी वास्तविक जरूरत, उपयोगिता और लागत की गहन जांच जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक शर्मा के ऊर्जा विभाग में रहते हुए भी इस प्रोजेक्ट पर लंबी चर्चा हुई थी, लेकिन इन बिंदुओं के चलते अंतिम निर्णय नहीं हो पाया था।
यह प्रोजेक्ट टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग (टीबीसीबी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) को सौंपी गई है। बिडिंग प्रक्रिया से लेकर चयनित कंपनी से प्रोजेक्ट का निर्माण और संचालन करवाने तक की पूरी जिम्मेदारी पीएफसी के पास रहेगी। निजी कंपनी को यह प्रोजेक्ट 35 वर्षों की अवधि के लिए सौंपा जाएगा। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इसकी लागत की वसूली बिजली टैरिफ के माध्यम से उपभोक्ताओं से की जाएगी।
राजस्थान राज्य उत्पादन निगम 2,450 मेगावाट और अक्षय ऊर्जा निगम 3,310 मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट डवलप कर रहे हैं। इस बिजली को ले जाने के लिए नए ट्रांसमिशन नेटवर्क सिस्टम की जरूरत है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी हब बन रहा है। ऐसे में बड़े ट्रांसमिशन निवेश जरूरी हैं।