जयपुर

‘टेंशन’ के बीच राजस्थान में 44 PAK विस्थापितों को मिली हिंदुस्तान की नागरिकता

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Mar 07, 2019
Migrants from Pakistan issued Indian Citizenship in Rajasthan

जयपुर।

भारत पाकिस्तान के बीच जारी टेंशन के बीच राजस्थान की गहलोत सरकार ने पाक विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का कदम उठाया है। सरकार ने 44 पाक विस्थापतों को भारतीय नागरिकता प्रदान की है। जानकारी के अनुसार जनवरी, 2019 से 6 मार्च 2019 तक विशेष अभियान चलाकर राज्य में लम्बे समय से निवास कर रहे 44 पाक विस्थापतों को भारतीय नागरिकता प्रदान की है।


इन ज़िलों में दी गई नागरिकता
सरकार की ओर से 44 पाक विस्थापतों को दी गई भारतीय नागरिकता में उदयपुर के 15, पाली के 11, जालोर के 6 व बाडमेर में निवासरत 12 पाक विस्थापित शामिल हैं।


अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह राजीव स्वरूप ने बताया कि राज्य सरकार के स्तर से इस अवधि में कुल 44 पाक नागरिकों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि इन प्रकरणाें में लम्बे समय से कई प्रकार की कमियां थी जिनकी पूर्ति करवाकर नागरिकता प्रदान की गयी है।


आवेदन प्रक्रिया है ऑनलाइन
प्रदेश में पाकिस्तान के अलावा बांग्लादेश और अफगानिस्तान विस्थापितों को अब घर बैठे भारतीय नागरिकता दिलाने की मंशा से हाल ही में ऑनलाइन व्यवस्था शुरू हुई है। भारतीय नागरिकता के लिए सालों तक इंतजार करने वाले विस्थापितों को सभी दस्तावेज सही होने पर अब कुछ ही महीनों में नागरिकता मिल रही है। इसके लिए गत वर्ष अक्टूबर माह में आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन करने के बाद अब नागरिकता की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया। इससे अब विस्थापितों को विभिन्न विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे। अधिकारियों के हस्ताक्षर से लेकर विभिन्न विभागों में दस्तावेज व वेरीफिकेशन का काम भी ऑनलाइन ही हो रहा है। इसके साथ पाक विस्थापित फाइल स्टेटस के साथ सभी जानकारी एसएमएस से मिल रही है। पूरी प्रक्रिया के बाद नागरिकता के प्रमाण पत्र भी उनके घर भिजवाये जा रहे हैं।

दरअसल, इस व्यवस्था से पहले आवेदन के बाद नागरिकता के लिए दस्तावेज व विभिन्न विभागों से वेरीफिकेशन के काम में महिनों लग जाते थे। आवेदन की फाइल कौन से विभाग में है और कौनसे दस्तावेज अधूरे इसका पता लगाने के लिए आवेदनकर्ता को विभागों के चक्कर काटने पड़ते थे। प्रक्रिया को सरल करने के लिए प्रशासन की ओर से गत दो वर्षो में कई बार शिविर भी आयोजित किए गए। शिविर में कई लोगों को नागरिकता दी गई, लेकिन फाइलों के डिस्पोजल में महीनों का समय लगने के कारण पेंडेंसी कम नहीं हो रही थी। इस पर आवेदन के बाद फाइल के डिस्पोजल तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया। आवेदन के बाद अब विभिन्न विभागों में वेरीफिकेशन, अधिकारियों के हस्ताक्षर व अन्य सभी काम ऑनलाइन हो रहे हैं।

Published on:
07 Mar 2019 07:57 am