माइनिंग व जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग, लागत में कमी व अधिक एफिसिएंसी के लिए प्रशिक्षण व अध्ययन रिपोर्टों में प्राप्त सुझावों को धरातल पर लागू किए जाने की जरूरत है।
माइनिंग व जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग, लागत में कमी व अधिक एफिसिएंसी के लिए प्रशिक्षण व अध्ययन रिपोर्टों में प्राप्त सुझावों को धरातल पर लागू किए जाने की जरूरत है। माइंस सेफ्टी एफिसिएंसी, माइनिंग में प्रबंधकीय दक्षता, एनर्जी ऑडिट, थर्ड पार्टी निरीक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञ सहभागिता निभाते हुए हानि के स्तर को न्यूनतम स्तर पर लाने के प्रयास जारी रखे जाने चाहिए।
पानी-बिजली का बेहतर उपयोग
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, पेट्रोलियम व पीएचईडी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि घरेलू उपयोग से लेकर कल कारखानों तक में पानी-बिजली का बेहतर उपयोग और कार्मिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने से बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इसी तरह, खनिज खनन में भी बेहतर तकनीक और न्यूनतम हानि अधिकतम परिणाम के सुझाव लागू किया जा सकता है। वर्तमान में सरकारी उपक्रम द्वारा 150 इंजीनियर्स, इकोनोमिस्ट, मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के साथ ही 100 अन्य विशेषज्ञों के माध्यम से वाटर-एनर्जी ऑडिट, थर्ड पार्टी निरीक्षण, नीति दस्तावेज तैयार करने, प्रोजेक्ट फारमूलेशन, इवेलुएशन यहां तक कि रिक्रूटमेंट कार्य में सहभागिता की भूमिका निभा रही हैं। एनपीसी का नेटवर्क समूचे देश में फैला हुआ है और उत्पादकता बढ़ाने में शोध, अध्ययन, ऑडिट, निरीक्षण आदि कार्याें के साथ प्रभावी भूमिका निभा रहा है।