अलवर के रामगढ़ में गौ तस्करी मामले में मॉब लिंचिंग की घटना
जयपुर. अलवर के रामगढ़ में गौ तस्करी के मामले में अकबर की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस जहां इसमें अपना बचाव करने में लगी है, वहीं विपक्ष इसके लिए सरकार से जवाब मांग रहा है। अकबर की मौत के मामले में पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को अधिकारियों की दो घंटे तक चली बैठक में मजिस्ट्रेट जांच करवाने का निर्णय लिया जा सकता है। बैठक में मजिस्ट्रेट जांच करवाने का फैसला लिया जा सकता है। अकबर की मौत पुलिस कस्टडी में आने के बाद होने के मामले के तूल पकडऩे पर यह निर्णय लिया जा सकता है।
इससे पहले मामले के तूल पकडऩे पर पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने भी सक्रियता दिखाते हुए डीजीपी ओपी गल्होत्रा ने सोमवार को एडीजी क्राइम पीके सिंह, एडीजी कानून-व्यवस्था एनआरके रेड्डी, राज्य में गौ तस्करी के मामलों के नोडल अधिकारी व आइजी सीआइडी महेन्द्र चौधरी की संयुक्त कमेटी बनाई थी। कमेटी को अकबर को अस्पताल पहुचंाने में हुई देर और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था।
जांच टीम ने रात को ही कमेटी की रिपोर्ट डीजीपी को रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट में बताया कि सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन मौके पर मिले घायल व्यक्ति की अंदरुनी चोट का सही अनुमान नहीं लगा पाई और गायों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था में जुट गई। इसके चलते घायल को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि अकबर उर्फ रकबर की पसलियों में अंदरुनी चोट के कारण उसकी मौत हुई है। इस मामले में घटना स्थल पर पहुंचे पुलिस टीम के प्रभारी एएसआई मोहन सिंह को तत्काल घायल को अस्पताल नहीं पहुंचाने के कारण निलम्बित कर दिया गया।
कमेटी ने यह भी बताया कि अकबर आराम से बातचीत कर रहा था। घायल और पकड़ी गई गायों को लेकर थाने के सामने से निकल रहे थे, तब रात ढाई बजे अकबर को थाने में छोड़ 8 किलोमीटर दूर गोशाला में गायों को छोडऩे चले गए, जहां उसे चाय पिलाई, उसके गंदे हुए कपड़े बदले गए। करीब 3.20 बजे गो-शाला से लौटते ही अकबर को अस्पताल ले गए, लेकिन वहां मृत घोषित कर दिया