जयपुर

Jaipur News: बरसाती पानी को लेकर JDA का बड़ा प्लान, 55.5 करोड़ की लागत से जयपुर में ऐसे बढ़ेगा जलस्तर

Jaipur Drainage Project: बरसात का पानी जयपुर शहर में रहे, इसके लिए जेडीए एक नवाचार करने जा रहा है।

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Jan 02, 2026
ड्रेनेज प्रोजेक्ट। फोटो: पत्रिका

जयपुर। बरसात का पानी जयपुर शहर में रहे, इसके लिए जेडीए एक नवाचार करने जा रहा है। इसकी शुरुआत कालवाड़ रोड से खिरणी फाटक होते हुए खातीपुरा तक प्रस्तावित ड्रेनेज प्रोजेक्ट में की जा रही है। जानकारों की मानें तो राजस्थान में पहली बार मॉड्यूलर वाटर हार्वेस्टिंग पिट तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक से बरसाती पानी का अधिकांश हिस्सा भूगर्भ में रिचार्ज होगा और शेष पानी नियंत्रित रूप से द्रव्यवती नदी तक पहुंचाया जाएगा।

हाल ही जेडीए की कार्यकारी समिति बैठक में 33 करोड़ रुपए की लागत से कालवाड़ रोड-खिरणी फाटक-खातीपुरा मार्ग पर पौने नौ किमी लंबाई में ड्रेनेज कार्य को मंजूरी दी गई है। वहीं, खातीपुरा से झोटवाड़ा होते हुए आर्मी एरिया तक 3200 मीटर लंबा ड्रेनेज कार्य पहले से प्रगतिरत है, जिस पर करीब 12.50 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत 55.5 करोड़ रुपए है।

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अभी 40 हजार से अधिक आबादी है प्रभावित

इस पूरे रूट पर हर मानसून में जलभराव से परेशान रहने वाली 40 हजार से अधिक आबादी को इस वर्ष राहत मिल जाएगी। जेडीए अधिकारियों का कहना है कि मानसून से पहले काम पूरा हो जाएगा। ड्रेनेज सिस्टम के पूरा होने से कालवाड़ रोड, खिरणी फाटक और खातीपुरा क्षेत्र में पानी भराव की समस्या समाप्त होगी।

ड्रेनेज के साथ जल संरक्षण

प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि इसमें ड्रेनेज के साथ वर्षा जल संरक्षण को अनिवार्य रूप से जोड़ा गया है। लगभग ढाई करोड़ रुपए की लागत से मॉड्यूलर वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक को लागू किया जाएगा। कालवाड़ रोड पर ही ड्रेनेज के मुहानों पर मॉड्यूलर वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे, ताकि नालों में प्रवेश करने से पहले बरसाती पानी सीधे भूगर्भ में समा सके।

ऐसे होगी व्यवस्था

-खातीपुरा क्षेत्र में खुले स्थानों पर बड़े वाटर हार्वेस्टिंग टैंक बनाए जाएंगे। ड्रेनेज में बहने वाला अधिकांश पानी इन टैंकों में संग्रहित होकर भूगर्भ में रिचार्ज होगा। ओवरफ्लो पानी खातीपुरा ओवरब्रिज के पास गणेश मंदिर क्षेत्र से होते हुए अंतत: द्रव्यवती नदी तक पहुंचेगा।
-ड्रेनेज और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के निर्माण के बाद संबंधित एजेंसी को तीन वर्ष तक संचालन और रखरखाव करेगी।

सिस्टम ऐसे करेगा काम

-बारिश का पानी सतह से ड्रेनेज-पाइपों से मॉड्यूलर इकाई तक आता है।
-फिल्टरिंग के बाद पर्यावरण के अनुकूल ब्लॉक्स में प्रवेश करता है
-धीरे-धीरे पानी नीचे भूजल स्तर तक पहुंचता है
-भूजल स्थिति मजबूत होती है और भूजल पुनर्भरण होता है
यह जल स्तर को कैसे सुधारता है
-बरसाती पानी पिट के जरिए पानी सीधे मिट्टी के भीतर जाता है, जिससे जमीन के नीचे पानी की मात्रा बढ़ती है।
-इससे जलस्तर ऊपर आता है और बोरवेल से पानी की आपूर्ति बेहतर होती है।
-पानी सतह पर बहने के बजाय, इसे संरक्षित करके आगे के उपयोग में लाया जा सकता है। यह स्थानीय पानी संकट को कम करता है।
-जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी आसानी से निकल जाता है और जलभराव से लोगों को राहत मिलेगी।

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