जयपुर

Nagaur Factory Blast: 15 किलो बारूद बनाने की थी परमिशन, मौके पर मिला विस्फोटक का जखीरा; अब उठे ये 5 बड़े सवाल

Nagaur Godown Blast: नागौर शहर के बड़ली क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 9.40 बजे बारूद के गोदाम में हुए तीन भीषण धमाकों ने न केवल दो परिवारों की खुशियां छीनी, बल्कि आबादी क्षेत्र में विस्फोटक सामग्री के भंडारण और निर्माण की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी।
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Updated: 6 Nov 2026, 8:09 AM IST
Nagaur Factory Blast
ब्लास्ट के बाद मौके पर जांच में जुटी पुलिस। फोटो: पत्रिका

नागौर। नागौर शहर के बड़ली क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 9.40 बजे बारूद के गोदाम में हुए तीन भीषण धमाकों ने न केवल दो परिवारों की खुशियां छीनी, बल्कि आबादी क्षेत्र में विस्फोटक सामग्री के भंडारण और निर्माण की निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी। धमाके इतने तेज थे कि करीब दो किलोमीटर दूर तक आवाज सुनाई दी। विस्फोटक से गोदाम का कमरा ढह गया। अंदर मौजूद दो युवकों के शरीर के चिथड़े उड़ गए। दोनों की मौके पर मौत हो गई।

जानकारी के मुताबिक गोदाम में बारूद तैयार करने की अनुमति महज 15 किलो की थी, जबकि मौके पर बड़ी मात्रा में पोटाश, सल्फर और अमोनियम नाइट्रेट जैसी विस्फोटक सामग्री से भरे कट्टे, शोरा पीसने की चक्की और पटाखे बनाने के अन्य उपकरण मिले हैं। गोदाम के एक हिस्से में पटाखों का स्टॉक भी रखा था। ऐसे में क्षमता से अधिक बारूद तैयार करने और विस्फोटक सामग्री का भंडारण को लेकर पुलिस जांच में जुटी है।

1962 में शोरगर परिवार को मिला था लाइसेंस, तीन पीढ़ियों से कारोबार

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार शोरगर परिवार को गोदाम में विस्फोटक सामग्री रखने और बारूद तैयार करने का लाइसेंस सबसे पहले वर्ष 1962 में जारी किया गया था। इसके बाद लाइसेंस मोहम्मद उमर के नाम जारी हुआ और वर्ष 2012 में मोहम्मद आमीन शोरगर के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद भी लाइसेंस लगातार रिन्यू होता रहा। गुरुवार को हुए हादसे के बाद अब लाइसेंस जारी करने से लेकर हर बार उसके नवीनीकरण तक की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। नियमानुसार लाइसेंस की शर्तों, निर्धारित क्षमता और सुरक्षा इंतजामों की पालना सुनिश्चित करना जरूरी था।

15 किलो की अनुमति, मौके पर मिले बारूद बनाने के उपकरण

पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार गोदाम मालिक मोहम्मद आमीन शोरगर के नाम जारी लाइसेंस के अनुसार वह एक समय में अधिकतम 15 किलो बारूद तैयार कर सकता था। इसके बावजूद निर्धारित क्षमता से अधिक बारूद तैयार करने की आशंका जताई जा रही है। मौके पर बारूद पीसने की चक्की सहित कई उपकरण मिले हैं। पोटाश, सल्फर के साथ अमोनियम नाइट्रेट जैसा पदार्थ मिला है, जिसकी जांच के बाद पहचान हो सकेगी। पुलिस ने गुरुवार शाम को बरामद सामग्री जब्त कर जांच के लिए भेजी। अब फोरेंसिक जांच और लाइसेंस की शर्तों के मिलान से पता चलेगा कि मौके पर कितनी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और उसका उपयोग किस काम में हो रहा था।

तीन धमाकों से ढहा कमरा, 15-20 फीट दूर तक बिखरे शरीर के अंग

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगा सकते है कि विस्फोट के बाद दोनों युवकों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए। शरीर के अंग 15 से 20 फीट दूर तक जा गिरे, जिन्हें पुलिस और स्थानीय लोगों ने एकत्र किया। धमाकों से गोदाम का कमरा पूरी तरह ढह गया। मृतकों की पहचान बाजरवाड़ा निवासी मोहम्मद आमिर (28) पुत्र मोहम्मद आमीन शोरगर और मोहम्मद मुजीब शोरगर (32) पुत्र मोहम्मद अयूब शोरगर के रूप में हुई। दोनों आपस में चचेरे भाई थे। हादसे के समय एक अन्य युवक कुछ सेकंड पहले ही गोदाम से बाहर निकला था। धमाके के प्रभाव से वह अचेत होकर गिर गया।

आसपास ही रखा था विस्फोटक सामग्री और पटाखों का स्टॉक

जिस कमरे में विस्फोट हुआ, उसकी किस्म गैर मुमकिन शोरगर है, उसी भूखंड के पश्चिमी दिशा में टिनशेड के कमरे भी बने हुए हैं। इनमें बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और पटाखे रखे थे। गनीमत रही कि आग और धमाके इन कमरों तक नहीं पहुंचे। हालांकि धमाकों से दीवारों में दरारें आ गईं। यदि कोई चिंगारी वहां रखे विस्फोटक पदार्थों तक पहुंच जाती तो बड़ली क्षेत्र में जनहानि का आंकड़ा कहीं अधिक भयावह हो सकता था। आसपास घनी आबादी होने के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का भंडारण होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शिकायतों के बावजूद नहीं चेते जिम्मेदार, आग बुझाने के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं

स्थानीय लोगों के अनुसार गोदाम में विस्फोटक सामग्री जमा करने को लेकर पहले कई बार शिकायतें की गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। गोदाम में आग बुझाने के लिए पर्याप्त संसाधन नजर नहीं आए। वहां केवल पानी का एक हौद बना हुआ था। हादसे के बाद पुलिस ने एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया। टीम ने गोदाम से मिले केमिकल, विस्फोटक सामग्री और अन्य वस्तुओं के नमूने एकत्र किए। पुलिस ने पोटाश, सल्फर जैसे पदार्थों से भरे कट्टों सहित अन्य सामग्री जब्त कर नमूने जांच के लिए भेजे हैं।

पांच जनों को हिरासत में लिया

हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ में कुछ लोगों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने लाठियां फटकारकर भीड़ को खदेड़ा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पार्षद चैनाराम, दरगाह सदर शमशेर सहित पांच जनों को हिरासत में लिया गया। इसे लेकर माली समाज के अध्यक्ष कृपाराम देवड़ा सहित माली समाज के लोग व उप सभापति शरीफ कुरैशी सहित अन्य लोग कोतवाली थाने पहुंचे तथा दोनों पक्षों से समझाइश का मामला शांत कराया। इसके बाद पुलिस ने सबको छोड़ दिया।

जांच के बाद खुलेगा विस्फोट का राज

बारूद के गोदाम में आग कैसे लगी और एक के बाद एक तीन धमाके किस वजह से हुए, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है। नागौर डीएसपी जतिन जैन ने बताया कि गोदाम के पास बिजली का पोल होने से शॉर्ट सर्किट की आशंका भी जताई जा रही है। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि गोदाम के अंदर मौजूद युवक के हाथ से कोई विस्फोटक सामग्री गिरने से धमाका हुआ होगा। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक कारण जांच और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

ये पांच सवाल जिनके जवाब जरूरी

  • लाइसेंस की शर्तों की जांच किसने की? 1962 से संचालित लाइसेंस के नवीनीकरण के दौरान सुरक्षा मानकों और निर्माण क्षमता का भौतिक सत्यापन हुआ या नहीं?
  • 15 किलो से अधिक बारूद कैसे तैयार हो रहा था? निर्धारित क्षमता से अधिक उत्पादन की आशंका पर संबंधित विभागों ने निगरानी क्यों नहीं रखी?
  • शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्थानीय लोगों की ओर से विस्फोटक सामग्री के भंडारण को लेकर शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रशासन क्यों नहीं चेता?
  • आबादी क्षेत्र में सुरक्षा इंतजाम कहां थे? आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन, आपातकालीन व्यवस्था और अन्य सुरक्षा मानकों की पालना क्यों नहीं करवाई गई?
  • लाइसेंस रिन्यू करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा? यदि निरीक्षण हुआ तो खामियां पकड़ में क्यों नहीं आईं और यदि नहीं हुआ तो लाइसेंस का नवीनीकरण किस आधार पर किया गया?

पत्रिका व्यू : सुरक्षा निगरानी को लेकर कौन जवाबदेह?

बड़ली हादसे ने विस्फोटक सामग्री के भंडारण और बारूद निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छह दशक से लाइसेंस का नवीनीकरण होता रहा और तीन लोगों के नाम हस्तांतरण भी हुआ, लेकिन सुरक्षा इंतजामों और बारूद निर्माण की वास्तविक मात्रा की जांच किसने की? लाइसेंस रिन्यू करते समय क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया? यदि किया तो क्षमता से अधिक बारूद तैयार करने की आशंका और सुरक्षा में खामियां नजर क्यों नहीं आईं? आबादी क्षेत्र में विस्फोटक सामग्री के भंडारण के बावजूद संबंधित विभागों की निगरानी इतनी कमजोर कैसे रही? दो लोगों की मौत महज हादसा नहीं, सरकारी निगरानी तंत्र की विफलता पर सवाल है। जांच केवल विस्फोट के कारणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छह दशक पुराने लाइसेंस, भंडारण, उत्पादन क्षमता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

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6 Nov 2026, 8:09 AM IST
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