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राजस्थान में इस बार कितने साल के लिए होंगे सरपंच-जिला प्रमुख? कार्यकाल को लेकर आया बड़ा अपडेट

राजस्थान में पंचायत चुनावों के बीच ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के कार्यकाल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट की गई है। राजस्थान के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने एक पोस्ट के जरिए जानकारी साझा की है।
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जयपुर

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Kamal Mishra

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Updated: 5 Nov 2026, 11:03 PM IST

Rajeshwar Singh

राजस्थान के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह। फोटो-पत्रिका

जयपुर। राजस्थान में पंचायत चुनावों के बीच सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख के कार्यकाल को लेकर लोगों के मन में उठ रहे सवालों पर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद का कार्यकाल कितने साल का होगा और इस बार चुने जाने वाले जनप्रतिनिधि कितने समय तक पद पर रहेंगे, इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। इसको लेकर राजस्थान के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह की ओर से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में साफ किया गया है कि पंचायतों का कार्यकाल 5 साल ही रहेगा।

राजेश्वर सिंह अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के साथ-साथ इनके निर्वाचित पदाधिकारियों और सदस्यों का कार्यकाल भी पहले की तरह पांच वर्ष रहेगा। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस संबंध में अफवाह फैलाने वालों से सतर्क रहने की अपील की है।

सरपंच से जिला प्रमुख तक 5 साल का कार्यकाल

पोस्ट के मुताबिक, ग्राम पंचायत में सरपंच, उपसरपंच और वार्ड पंच का कार्यकाल 5 साल रहेगा। इसी तरह पंचायत समिति में प्रधान, उपप्रधान और सदस्य तथा जिला परिषद में प्रमुख, उपप्रमुख और सदस्यों का कार्यकाल भी पांच वर्ष का होगा। यानी इस बार पंचायत चुनाव में जीतकर आने वाले जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल को लेकर किसी नए बदलाव की जानकारी नहीं दी गई है।

14,403 ग्राम पंचायतों में हो रहे चुनाव

राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही कार्यक्रम घोषित कर चुका है। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के चुनाव चार चरणों में कराए जा रहे हैं। चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सरपंच से लेकर जिला परिषद सदस्य तक के पदों पर प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

ऐसे में कार्यकाल को लेकर फैली चर्चाओं के बीच यह स्पष्टीकरण अहम है। मतदाताओं और चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट संदेशों के बजाय आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।

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