
जयपुर। नमो भारत (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) रेल कॉरिडोर परियोजना को लेकर गुरुवार को राजस्थान और हरियाणा के मुख्य सचिवों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक हुई। बैठक में राजस्थान के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को बताया कि राज्य सरकार ने आरआरटीएस परियोजना के प्रथम चरण के लिए संशोधित डीपीआर के अनुसार वित्तीय भार वहन करने का निर्णय लिया है।
इसके तहत राजस्थान में करीब 1.13 किलोमीटर ट्रैक विकसित किया जाएगा, जिससे राज्य की लागत राशि 103 करोड़ रुपए से बढ़कर 124.26 करोड़ रुपए हो गई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से परियोजना की लागत सिर्फ बाबल तक ही वहन करने का निर्णय लेने के कारण राजस्थान पर करीब 510 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आने की स्थिति बन रही है।
जबकि दोनों राज्यों के बीच हुए एमओयू के अनुसार सहभागी राज्यों को अपने हिस्से की 20 प्रतिशत लागत वहन करनी थी। राजस्थान के मुख्य सचिव ने हरियाणा सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। इस पर हरियाणा के मुख्य सचिव ने मामले पर विचार कर जल्द निर्णय से अवगत कराने का आश्वासन दिया।
इस परियोजना के लागू होने से शाहजहांपुर, घीलोठ, नीमराणा और बहरोड़ जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे दिल्ली और गुरुग्राम से हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे उद्योगों के लिए तेज आवागमन और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं बेहतर होंगी, जिससे क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित केबीएनआईआर टाउनशिप को भी इस कॉरिडोर से सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से औद्योगिक निवेश बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।