जयपुर

Rajasthan News : देश के आखिरी सरहदी गांव तक पहुंचा नर्मदा का मीठा पानी, जानें कैसे हुआ ‘चमत्कार’?

भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित सुंदरा गाँव, जो दशकों से पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था, अब 'नर्मदा के नीर' से सराबोर हो गया है। 728 किलोमीटर का सफर तय कर जब माँ नर्मदा का पानी इस सरहदी गाँव पहुँचा, तो वर्षों का सूखा और संघर्ष एक झटके में खत्म हो गया।

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Apr 10, 2026
File Pic

थार के रेगिस्तान की तपती रेत और अंतरराष्ट्रीय सीमा की चुनौतियों के बीच बसे सुंदरा गाँव ने आज एक नया इतिहास रचा है। आज़ादी के 78 साल बाद, इस गाँव के हर घर तक पहली बार नल से स्वच्छ और मीठा पेयजल पहुँचा है। यह सफलता केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों की जीत है जिन्होंने पीढ़ियों से खारा पानी पीकर अपना जीवन काटा है।

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1734 में बसा गाँव, पानी की सबसे बड़ी समस्या

सुंदरा गाँव का इतिहास बहुत पुराना है। 1734 में स्थापित यह गाँव कभी क्षेत्रफल के लिहाज से देश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत हुआ करता था (1345 वर्ग किमी)। लेकिन इतनी बड़ी पहचान के बावजूद, यहाँ की सबसे बड़ी समस्या पीने का पानी थी।

यहाँ का ज़मीनी पानी इतना खारा था कि वह पीने लायक नहीं था। सरकारी ट्यूबवेल भी इस समस्या का समाधान नहीं कर पाए। ग्रामीणों को पानी के लिए 15 से 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था।

युद्ध और विस्थापन की यादें

सीमा पर स्थित होने के कारण सुंदरा गाँव ने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की विभीषिका झेली है। युद्ध के समय ग्रामीणों को गाँव खाली करना पड़ा था। इन ऐतिहासिक चुनौतियों के बीच, पानी की कमी ने यहाँ के जनजीवन को हमेशा 'अस्थिर' बनाए रखा।

'नर्मदा नहर परियोजना': असंभव को किया संभव

सरदार सरोवर बांध (गुजरात) से शुरू होकर नर्मदा का पानी राजस्थान के रेतीले टीलों को चीरते हुए 728 किलोमीटर दूर सुंदरा पहुँचा है।

  • बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर: करीब 513 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत 200 से अधिक गाँवों को कवर किया गया है।
  • तकनीकी चुनौती: ऊँचे रेतीले टीलों के बीच पाइपलाइन बिछाना, बिजली की अनुपलब्धता और सीमा क्षेत्र की सुरक्षा पाबंदियों के बावजूद इंजीनियरों ने इस कार्य को पूरा किया।
  • नेटवर्क: इस प्रोजेक्ट में 16 जल संग्रहण केंद्र (CWR), दर्जनों पंपिंग स्टेशन और 80 से अधिक ऊँची टंकियां (ESR) बनाई गई हैं।
बाड़मेर का सरहदी गांव सुंदरा - File PIC

स्वास्थ्य और जीवन में क्रांतिकारी बदलाव

दशकों से खारा पानी पीने के कारण सुंदरा के लोगों में समय से पहले बुढ़ापा, कमजोर हड्डियां और दांतों का पीलापन जैसी बीमारियां घर कर गई थीं।

गाँव की महिलाओं के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। अब उन्हें मीलों दूर मटके लेकर नहीं जाना पड़ता। 80-90 साल की बुजुर्ग महिलाओं ने जब पहली बार घर के आंगन में मीठे पानी का नल देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

विकास की नई इबारत

सुंदरा अब केवल एक 'प्यास' बुझने की कहानी नहीं है, बल्कि यह देश के अंतिम छोर तक विकास पहुँचने का प्रतीक है। मीठे पानी की उपलब्धता से अब यहाँ पशुपालन और कृषि की नई संभावनाएं भी तलाश की जा सकेंगी, जिससे सीमावर्ती इलाकों से होने वाले पलायन पर भी रोक लगेगी।

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Published on:
10 Apr 2026 02:12 pm
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