राजस्थान में उद्योगों के लिए RIICO ने पिटारा खोल दिया है। 79 औद्योगिक क्षेत्रों में 7 हजार प्लॉट की अलॉटमेंट प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो काफी कम दाम पर मिल रही है। जिसकी अंतिम तारीख 26 सितंबर है। पूरी जानकारी के लिए खबर के नीचे तक गुजर जाइए…
जयपुर। राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (RIICO) शुक्रवार से भूमि आवंटन का पांचवां चरण शुरू करने जा रहा है। यह आवंटन "राइजिंग राजस्थान निवेश शिखर सम्मेलन" के दौरान हुए एमओयू धारकों के लिए होगा। इस बार भी हाल ही में शुरू की गई 'अविकसित भूमि योजना' को निवेशकों के लिए और आकर्षक बनाया गया है।
नवीनतम चरण में राज्यभर के 79 औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 7,000 प्लॉट उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे पहले हुए चार चरणों में RIICO ने 709 प्लॉट बेचे, जिनका क्षेत्रफल 279 हेक्टेयर था और इससे 1,792 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।
राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि अविकसित भूमि योजना निवेशकों के लिए बेहद फायदेमंद है। यह जमीन सीधे DLC रेट पर दी जाती है, जिस पर केवल प्रशासनिक शुल्क जैसे मामूली अतिरिक्त खर्च जुड़ते हैं। उद्योग जगत ने मांग की है कि इस योजना के तहत और अधिक औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि को खोलना चाहिए ताकि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) भी इसका लाभ ले सकें।
पहले RIICO जमीन की नीलामी के माध्यम से ही आवंटन करता था, लेकिन दरें बहुत ऊंची होने से छोटे उद्योग इसमें शामिल नहीं हो पाते थे। अब सीधी अलॉटमेंट योजना लागू होने के बाद निवेशकों को राहत मिली है। हालांकि, उद्योग जगत का मानना है कि मौजूदा दरें अपेक्षाकृत सस्ती जरूर हैं, परंतु अविकसित भूमि की कीमत सबसे किफायती है और इसी दिशा में सरकार को और कदम उठाने चाहिए।
RIICO की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार, इस चरण के लिए आवेदन 26 सितंबर तक किए जा सकेंगे। यदि किसी प्लॉट के लिए केवल एक आवेदन आता है तो वह सीधे उसी आवेदक को आवंटित होगा। वहीं, एक से अधिक आवेदक होने की स्थिति में ई-लॉटरी के जरिए निर्णय होगा। बड़े आकार के प्लॉट (50,000 वर्ग मीटर से अधिक) के लिए आवंटन पात्रता और आवश्यकता के आधार पर किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से राजस्थान में निवेश का माहौल और बेहतर होगा। खासकर एमएसएमई सेक्टर को सीधी अलॉटमेंट और अविकसित भूमि की रियायती दरों से बड़ी राहत मिलने की संभावना है। इससे न केवल नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार सृजन में भी तेजी आएगी।