जयपुर

राजस्थान के NH Toll Plaza पर करोड़ों का गबन! जानें ED Raid, नकली सॉफ्टवेयर और फ़र्ज़ी रसीदों की Inside Story

NHAI Toll Scam ED Raid : राजस्थान के हाईवे टोल बूथों पर फर्जी सॉफ्टवेयर से करोड़ों का चूना। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की 14 ठिकानों पर छापेमारी।
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Sep 02, 2026
National Highway Toll Plazas
नेशनल हाईवे टोल प्लाजा। (फोटो: पत्रिका)

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के टोल बूथों पर फर्जी और अनधिकृत सॉफ्टवेयर के जरिए समानांतर टोल वसूली करने और करोड़ों रुपये का सरकारी राजस्व हड़पने की आशंका है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की लखनऊ क्षेत्रीय शाखा ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत बुधवार 2 सितंबर की तड़के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-NCR, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल के 14 प्रमुख ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह कार्रवाई 22 जनवरी 2025 को दर्ज हुई एक पुलिस प्राथमिकी (FIR) और 19 मई 2025 को दर्ज की गई एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) के आधार पर अमल में लाई गई है।

'रॉग सॉफ्टवेयर' से डिजिटल घोटाला!

जांच एजेंसी ED के अधिकारियों ने खुलासा किया कि इस हाईटेक घोटाले को अंजाम देने के लिए संदिध ठेकेदारों और ऑपरेटरों ने NHAI के आधिकारिक टोल ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की थी।

टोल बूथों पर एक समानांतर 'रॉग सॉफ्टवेयर' (Rogue Software) इंस्टॉल किया गया था। जैसे ही कोई वाहन टोल प्लाजा से गुजरता था, यह अनधिकृत सॉफ्टवेयर कंप्यूटर से फर्जी रसीद जनरेट कर देता था। वाहन चालकों से नकद या डिजिटल माध्यमों से टोल की पूरी राशि वसूल कर ली जाती थी। यह पूरी वसूली NHAI के आधिकारिक खातों और अकाउंटिंग सिस्टम को पूरी तरह बायपास कर सीधे ठेकेदारों के निजी खातों में डायवर्ट कर दी जाती थी।

राजस्थान के कांट्रैक्टर्स पर ED की पैनी नजर

राजस्थान में इस जांच का मुख्य केंद्र राज्य से गुजरने वाले व्यस्ततम नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा और उन्हें संचालित करने वाली स्थानीय एजेंसियां व प्राइवेट ठेकेदार हैं।

ED की टीमें राजस्थान में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जांच कर रही हैं:

डिजिटल सबूतों की जब्ती: टोल बूथों के कंप्यूटर हार्ड ड्राइव, हिडन डिजिटल लॉग्स और सर्वर डेटा की मिररिंग की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि राजस्थान के राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रिड से कितनी रकम चुराई गई है।

अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ाव: शुरुआती जांच में सामने आया है कि राजस्थान के ऑपरेटर भी उसी लखनऊ-लिंक्ड सॉफ्टवेयर नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे साफ है कि एक संगठित तकनीकी सिंडिकेट विभिन्न राज्यों के टोल बूथों को यह फर्जी ऐप मुहैया करा रहा था।

NHAI के रिकॉर्ड्स से हुई हेराफेरी की पुष्टि

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की यह छापेमारी केवल संदेह के आधार पर नहीं, बल्कि पुख्ता फॉरेंसिक जांच और NHAI से प्राप्त डिजिटल रिकॉर्ड्स के आधार पर की गई है।

डिजिटल सिस्टम के फॉरेंसिक विश्लेषण में स्पष्ट रूप से साबित हुआ है कि टोल बूथों पर समानांतर सॉफ्टवेयर चलाकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ED अब इस बात की जांच कर रही है कि इस घोटाले के असली लाभार्थी कौन हैं और फर्जी रसीदों से एकत्र की गई अवैध कमाई को किन-किन शेल कंपनियों या संपत्तियों में निवेश किया गया है।

साक्ष्य जुटाने में जुटी टीमें

बुधवार तड़के शुरू हुई इस सर्च ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य फर्जी लेन-देन से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, बैंक खातों का ब्योरा और सॉफ्टवेयर कोड से संबंधित सबूतों को कब्जे में लेना है।

अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान सहित 7 राज्यों में की जा रही इस कार्रवाई से एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क का पूरी तरह से पर्दाफाश होगा।

Updated on:
02 Sept 2026 11:24 am
Published on:
02 Sept 2026 11:23 am